कानपुर में नकली दवा बनाकर बेचने के आरोप में पकड़े गए प्रियांशु चौहान की गतिविधियों से यहां के दवा व्यापारी अंजान थे। हालांकि गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद चर्चा में आए प्रियांशु ने कुछ दवा व्यापारियों से संपर्क करने कोशिश जरूर की थी, लेकिन वह अभी दवा की सप्लाई नहीं कर पाया था।
बताया जा रहा है कि वह धीरे-धीरे जिले में नेटवर्क बनाने में जुटा था, लेकिन चार माह पूर्व पकड़ी गई फेंसिडिल सिरप की वजह से उसने अपना हाथ पीछे खींच लिया। अगर फेंसिडिल कफ सिरप पकड़ी नहीं गई होती तो वह अपने दवाओं को अब तक जिले में बेचना शुरू कर देता।
यह भी बताया जा रहा है कि सिरप पकड़े जाने के बाद उसने दवाएं नहीं भेजीं। हालांकि पहले उसने, इसके लिए अपने सगे भाइयों को तैयार कर लिया था। इस काम के सिलसिले में उसने कुछ दवा व्यापारियों से मुलाकात भी की थी।
बता दें कि कानपुर के रतनलाल नगर में अपनी पत्नी और भाइयों के साथ मिलकर प्रियांशु नकली दवा बनाकर बेचने का काम करता था। इस मामले में कानपुर पुलिस ने प्रियांशु सहित आठ लोगों को पकड़कर उनके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की है। प्रियांशु, गोरखपुर के कृष्णानगर में रहता है।