कार्तिक पूर्णिमा 27 नवंबर को मनाई जाएगी। श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसी दिन देव दिवाली भी मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान से मनोवांछित फल मिलता है।
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वाराणसी के प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन पूर्णिमा तिथि का मान दिन में दो बजकर 17 मिनट तक है। कृतिका नक्षत्र भी दिन में एक बजकर 52 मिनट, पश्चात रोहिणी नश्रत्र, शिव योग और सुस्थिर नामक औदायिक योग है। वहीं 26 नवंबर की शाम से ही पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो रहा है और चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि होने से व्रत के लिए 26 नवंबर ही रहेगा, लेकिन स्नान-दान, तर्पण, जप, तप आदि 27 नवंबर ही मान्य रहेगा।
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा को प्रात: काल स्नान कर विधि पूर्वक शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए। संभव हो तो सत्यनारायण व्रत कथा का भी आयोजन करे। सायंकाल मंदिरों, चौराहों, गलियों, पीपल के वृक्षों और तुलसी के पौधों के पास दीपक जलाएं।