गोरखनाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूल से खाद बनाया जा रहा है।
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चढ़ावे के फूलों को खाद में इस्तेमाल करने के लिए शहर के मंदिरों से जल्द से जल्द समझौता करें। यह निर्देश, नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने मंगलवार को नगर निगम के अधिकारियों को दिए। मंगलवार को नगर आयुक्त ने सुभाषचंद्र बोस नगर स्थित मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने अविनाश प्रताप सिंह, सहायक नगर आयुक्त को गीले कचरे से खाद बनाने के लिए बनाई गई कंपोस्ट पिट को और अधिक क्षेत्र में फैलाने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि फूलों की मात्रा भी बढ़ाएं। इसके लिए मंदिरों को चिन्हित कर एग्रीमेंट किया जाए।
इस दौरान उन्होंने अवर अभियंता राजकुमार को खाद के लिए बनी संरचनाओं के ऊपर शेड लगाने के लिए कहा। स्वच्छ सर्वेक्षण के प्रचार-प्रसार के लिए एमआरएफ सेंटर पर वॉल पेंटिंग कराने पर भी जोर दिया। निरीक्षण के समय सहायक नगर आयुक्त डॉ. मणिभूषण तिवारी, अविनाश प्रताप सिंह, आरके पांडेय, राजकुमार, अवर अभियंता, ब्रजेश कुमार तिवारी उपस्थित रहे।
इलेक्ट्रिक बसों से एक दिन में एक लाख से अधिक की आय
इलेक्ट्रिक बसों ने एक दिन में एक लाख रुपये की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है। 14 फरवरी को इलेक्ट्रिक बस से 1,03,303 रुपये की कमाई हुई। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि शहर में सफाई व्यवस्था आदि कार्यों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय काली मंदिर, गोरखनाथ आदि रोड पर इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों से भरी मिलीं।
दशिका एचआर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक केके मिश्रा ने बताया कि महानगर में कुल 15 इलेक्ट्रिक बसें विभिन्न सड़कों पर चल रही हैं। 14 फरवरी को एक लाख रुपये से भी ज्यादा किराए के रूप में आय हुई। इस प्रकार इलेक्ट्रिक बसों से प्रदेश में नगर निगम गोरखपुर की आय एक नंबर पर है।