गोरखपुर कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने कहा कि गांवों में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के आवंटन को लेकर अब मनमानी नहीं चलेगी। लगातार मिल रही शिकायतों पर सख्ती करते हुए निर्देश दिया कि ग्रामसभा की खुली बैठक में ही कोटेदार का चयन होगा। किसी भी सस्ते गल्ले की दुकान को हटाने से पहले जिलापूर्ति अधिकारी के यहां प्रार्थनापत्र देकर अवगत कराना होगा।
दरअसल, गांवों की समस्याएं जानने के लिए कमिश्नर, एक नई पहल के तहत मंडल के अलग-अलग जिलों के 10-10 पंचायतों के प्रधानों से संवाद कर रहे हैं। शुरुआत गोरखपुर से हुई है। इसी क्रम में यह शिकायतें भी मिली हैं कि पंचायत चुनाव के बाद गांव की सरकार बदलने से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों को लेकर काफी विवाद है।
इसे गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने जिला पूर्ति अधिकारी व सभी प्रधानों को निर्देश दिया कि किसी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को मनमानी तरीके से आरोप-प्रत्यारोप लगाकर अपने चहेतों को आवंटित नहीं किया जा सकता। किसी भी कोटेदार को हटाने से पहले जिला पूर्ति अधिकारी के यहां प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराना होगा तत्पश्चात डीएसओ की निगरानी में ग्रामसभा में सार्वजनिक बैठक कर पक्ष व विपक्ष तथा ग्रामीणों के सामने इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। किसी दूसरे व्यक्ति को दुकानें आवंटित करने के पहले ग्राम सभा में समूह चलाने वाली महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।