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स्क्रब टाइफस से होता है एईएस, गोरखपुर सहित सात जिलों में शोध से सामने आया तथ्य

Fri, 30 Oct 2020 03:38 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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उत्तर प्रदेश के बस्ती और गोरखपुर सहित सात जिलों में स्क्रब टाइफस की वजह से एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) हो रहा है। रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) गोरखपुर के विज्ञानियों के शोध से पता चला कि 40-50 फीसदी मामले स्क्रब टाइफस से संबंधित हैं। यह बैक्टीरिया है। अगर समय से इलाज मिल गया तो स्वरूप नहीं बदल पाता है। मरीज के ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है।

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यह जानकारी आरएमआरसी के निदेशक डॉ रजनीकांत ने इंडियन मेडिकल रिसर्च सेंटर (आईसीएमआर) और एम्स पटना की ओर से आयोजित दो दिवसीय (28-29 अक्तूबर) वेबिनार के आखिरी दिन गुरुवार को दी।  

कोरोना संक्रमण के बीच संक्रामक रोगों से संबंधित वेबिनार में निदेशक ने कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) व एईएस का प्रकोप रहता है। जेई का स्वदेशी टीका राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) पुणे और भारत बायोटेक ने मिलकर बना लिया है। पहले सिर्फ चीन का टीका लगाया जाता था। टीकाकरण अभियान से ही जेई के मामलों में कमी आई है।
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैथालॉजी की निदेशक डॉ. पूनम सलोत्रा ने कहा कि हमें वैश्विक महामारी कोरोना सहित दूसरी बीमारियों की रोकथाम भी करनी है। बिहार में कालाजार का खतरा रहता है।

कांबिनेशन ट्रीटमेंट (पीकेडीएल) पर शोध में अच्छे नतीजे मिले हैं। पूरी दवा ली जाए तो आराम मिल सकता है। तबीयत में कुछ सुधार के बाद ही मरीज दवा लेना छोड़ देते हैं। इससे दवा प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो जाती है। एम्स पटना में एसोसिएट प्रोफेसर व बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. वीणा सिंह ने कोरोना मरीजों को अवसाद से बचाने की जानकारी दी। कहा कि सबसे अच्छा साधन योग व व्यायाम है।

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