गोरखपुर में भूमि के बैनामे के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे बेचने के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। इस सिलसिले में विवेचनाधिकारी प्रदीप कुमार सिंह ने चिलुआताल के प्रभारी निरीक्षक को पत्र भी लिखा है। विवेचनाधिकारी का कहना है कि आरोपों की पुष्टि हो गई है। अब आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
बिल्डर कमलेश कुमार सिंह ने महुअवा के जिऊत कुमार, गजरिया के अतुल कुमार सिंह, गंभीरपुर के यादवेंद्र प्रताप नारायण सिंह और मकरंदपुर के भारतेषु प्रताप सिंह के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी व साजिश रचने सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। कुछ दिन बाद ही कमलेश ने गोरखपुर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पुलिस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है। लिहाजा, एडीजी जोन से विवेचना संतकबीरनगर स्थानांतरित करने का अनुरोध कर दिया।
एडीजी ने विवेचना संतकबीरनगर पुलिस को दे दी। इसकी जांच मेंहदावल के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह ने की और 12 जून 2021 रिपोर्ट चिलुआताल पुलिस को सौंप दी। प्रभारी निरीक्षक ने चारों आरोपियों की गिरफ्तारी की जरूरत बताई है। इस सिलसिले में आरोपियों का पक्ष नहीं मिल सका है। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।
एक आरोपी को थाने से छोड़ने का आरोप
विवेचनाधिकारी की रिपोर्ट पर कार्रवाई न किए जाने का आरोप भी लगा है। इस मामले में पीड़ितों ने एडीजी जोन अखिल कुमार से मुलाकात भी की है। वादी कमलेश कुमार सिंह का आरोप है कि विवेचनाधिकारी की रिपोर्ट पर एक आरोपी को चिलुआताल पुलिस ने पकड़ा था लेकिन बस्ती मंडल के एक आला पुलिस अफसर के हस्तक्षेप पर उसे थाने से छोड़ दिया गया। स्पष्ट आदेश है फिर भी गिरफ्तारी नहीं हो रही है। वादी का कहना है कि अब डीजीपी मुकुल गोयल से मिलकर पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जाएगी।