वहीं, एसएसपी ने पुलिस को हर संदिग्ध मामले में जांच करने का आदेश दे दिया तो पता चला कि जिले में दुष्कर्म के 15 और छेड़खानी-पॉक्सो के 32 मुकदमे फर्जी दर्ज कराए गए हैं। इसके पीछे का मकसद किसी का वसूली का है तो किसी को आपसी रंजिश में फंसाने का।
हद तो यह है कि ज्यादातर मामलों में मासूम बच्चियों को आगे कर केस दर्ज कराया गया है। चिलुआताल थाने से जेल भेजी गई महिला गीता ने एक बच्ची को इस कदर समझा दिया था कि उसने हर बयान में उसी बात को कहा, जो उसे कहने को कहा गया था, लेकिन पुलिस ने जांच कर गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।
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केस एक
फर्जी अस्पताल की जांच शुरू की...खुला वसूली गिरोह
पुलिस फर्जी अस्पताल पर कार्रवाई कर मरीज माफिया पर नकेल कस रही थी। तभी एसएसपी के पास चिलुआताल की रहने वाली एक महिला आई। उसने पुलिस को बताया कि फर्जी नर्सिंग होम चलाने वाला विकास सिन्हा ने उसके पति को साजिश रचकर दुष्कर्म के आरोप में जेल भिजवा दिया है। फर्जी नर्सिंग होम के अभियान में ही एसएसपी ने जांच का आदेश दे दिया। पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि एक पूरा गिरोह है, जो फर्जी दुष्कर्म का केस दर्ज कराकर वसूली करता है। जांच में सामने आया कि मोतिहारी जिले के टाउनहाल, बलुआताल वार्ड नंबर 29 का रहने वाला विकास सिन्हा जेल बाईपास पर पादरी बाजार के पास छोटा अस्पताल चलाता था।
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वह शहर में किराए पर मकान लेकर जंगल सालिकराम मोहल्ले में रहने लगा। अस्पताल से वह दवा का व्यापार भी करता था। इसी दौरान उसकी कई लोगों से जान-पहचान हुई। इसके बाद उसने कई व्यापारियों से एक करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की और इसी ठगी के रुपयों से शाहपुर क्षेत्र में ही एक और अस्पताल खोल लिया। रुपये वापस मांगने पर ही उसने अपने साथी देवरिया की गीता, हेमंती की मदद से एक बच्ची को आगे करके पांच केस दर्ज कराए। इसमें महिला के पति को जेल भी जाना पड़ा। पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि बच्ची का फर्जी तरीके से टीसी भी तैयार किया गया था।
केस दो
दो सीओ ने की जांच...तब सामने आया था नफीसा गिरोह
दुष्कर्म का केस दर्ज कराकर रुपये ऐंठने वाली महिलाओं के गिरोह की दो सीओ ने जांच की, तब सच सामने आया था। इस मामले में भी एसएसपी ने पूरे प्रकरण की विवेचना की माॅनिटरिंग एएसपी मानुष को सौंपी, तब जाकर चार्जशीट दाखिल हो पाई। इसका खुलासा भी इसमें जेल जा चुके कैंपियरगंज के खालिद ने मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर की शिकायत पर की गई थी। जिसके बाद एसएसपी ने जांच का आदेश दिया था।
जांच में सामने आया है कि 2018 में राजघाट और गोरखनाथ में दुष्कर्म का केस दर्ज कराने वाली महिला अपनी बहन को आगे करती है, फिर बहन से खजनी थाने में तीन लोगों पर दुष्कर्म का केस दर्ज करा देती है। इस मामले में आरोपी जेल भी भेजे गए। एक युवक ने विरोध किया तो उसके परिचित पर गीडा थाने में सामूहिक दुष्कर्म का केस 2021 में दर्ज करा दिया गया। अब इस मामले की भी जांच पूरी हो चुकी है।
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केस तीन
रंजिश में बाप-बेटे को एक साथ बना दिया दुष्कर्म का आरोपी
सहजनवां थाने में एक युवती पहले अपने पसंद से शादी की। पति से बात नहीं बनी तो उसे छोड़ दी। फिर दोनों परिवार में रंजिश चलने लगी और फिर अचानक एक दिन युवती सामने आई और उसने कहा कि पिता-पुत्र समेत तीन लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया है।
पिता-पुत्र द्वारा दुष्कर्म की बात से पुलिस को भी घटना पर संदेह हुआ, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आपसी रंजिश में फंसाने के लिए केस दर्ज कराया गया है। पुलिस ने मोबाइल का सीडीआर भी निकाला तो घटना वाले दिन किसी की मौजूदगी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने इस केस में एफआर लगा दिया।
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एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि पुलिस ने फर्जी केस दर्ज कराकर वसूली करने वाली गिरोह का पर्दाफाश कर आरोपियों को जेल भेजा है। गिरोह में शामिल महिला को भी चिलुआताल थाने से जेल भेजा गया है। सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कई और मामले जिले में सामने आए हैं, जो पुलिस की जांच में फर्जी पाए गए हैं। लोग फंसाने के लिए आरोपी बना रहे हैं। जांच कर पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की है। फर्जी पाए गए केस में एफआर लगाया गया है।