जिला अस्पताल के इमरजेंसी से बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर की दूरी नौ किलोमीटर के करीब है। इसे तय करने में सरकारी एंबुलेंस को 30 से 35 मिनट लग रहे हैं। यह हाल तब है, जब असुरन से लेकर बीआरडी तक फोरलेन बन गया है।
ग्रीन कॉरिडोर पर चल रहा काम
मरीज को समय से जिला अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचाने के लिए प्रशासन पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर पर काम कर रहा है। इसके तहत बुधवार को ट्रॉयल हुआ, जिसमें 13 मिनट में मरीज को जिला अस्पताल के इमरजेंसी से बीआरडी के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। जबकि, लक्ष्य नौ से 10 मिनट का था।
ट्रामा सेंटर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि अगर मरीज सही समय पर अस्पताल पहुंच जाए, तो इलाज से उसकी जान बचाई जा सकती है। गंभीर मरीजों के गोल्डेन पीरियड भी तय हैं। इस पीरियड में अगर मरीज पहुंच जाते हैं, तो रिस्क कम हो जाता है, लेकिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में आने वाले कई मरीज समय से नहीं पहुंच पाते हैं, इसकी वजह से जान तक चली जाती है।
एमआरआई जीवीके के प्रोग्राम मैनेजर प्रवीण द्विवेदी ने कहा कि गोरखपुर में जाम की समस्या काफी है। इस वजह से शहर में 80 फीसदी एंबुलेंस भीड़ में फंस जाती हैं। ऐसे में मरीजों को ले जाने में दिक्कत होती है। फिर भी प्रयास रहता है कि एंबुलेंस समय पर लोगों तक पहुंच सके। इस दिशा में प्रशासन की मदद से ग्रीन कॉरिडोर पर काम शुरू हो चुका है।