गोरखपुर जिले के हथियापरास निवासी जनार्दन त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2014 से वह ओमेगा इस्पात स्टील कंपनी में क्वालिटी इंचार्ज के रूप में कार्य कर रहे थे। सूडान में गृह युद्ध से हालात अचानक ऐसे बिगड़े की जिंदगी ही बदल गई। धीरे- धीरे राशन खत्म हो गया था। बाजार बंद थे। सड़कों पर निकल नहीं सकते थे। लेकिन, भूखों मरने से पहले ही सरकार ने जीवन दान दे दिया।
खत्म हो चुकी थी परिवार से मिलने की उम्मीद
चौरीचौरा निवासी विजय बहादुर सिंह का कहना है कि सूडान में बिगड़े हालात के बीच परिवार के लोगों से मिलने की उम्मीद ही खत्म हो चुकी थी। घर वालों से ठीक से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। यहां उनका भी हाल बेहाल था। सभी की चिंता सता रही थी। भगवान पर सब कुछ छोड़ दिया था। उन्होंने सुनी भी। सरकार ने हमारी खोज-खबर ली और विदेशी धरती से हमें सुरक्षित निकाला। घर पहुंचते ही पहले सभी को जी भर देखूंगा। अब कहीं नहीं जाना। यहीं पर रोजगार करूंगा।
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रात-दिन यही सोचते थे, कैसे जान बचेगी
सूडान इंडिया में लूम ऑपरेटर पद पर कार्यरत शहर के राजेंद्र नगर निवासी मनीष गुप्ता कहते हैं कि नौ माह से कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन अचानक लड़ाई छिड़ जाने के बाद हालात खराब हो गए। वहां की सरकार ने खोज-खबर लेनी बंद कर दी। सुरक्षा के उपाय नाकाफी दिख रहे थे। चारों तरफ गोलियां और बमों की आवाज से कलेजा थर्रा जा रहा था। हर भारतीय रात-दिन केवल प्राण बचाने के ही उपाय सोच रहा था। दिल्ली पहुंचे तो जान में जान आई। यकीन हुआ कि अब तो परिवार से भी मिल ही लेंगे।
भारतीय ही नहीं, वहां के लोग भी संकट में
ओमेगा स्टील में इलेक्ट्रीशियन पद पर कार्यरत गोबरहिया गगहा निवासी देव नारायण का कहना है कि सूडान में भारतीयों की कौन कहे, स्थानीय लोगों को भी अपना जीवन संकट में दिख रहा है। पैरा मिलिट्री फोर्स में किशोर शामिल हो गए हैं और वह बिना कुछ समझे लोगों पर गोलियां बरसा रहे हैं। चारों तरफ भय का माहौल व्याप्त है।
ओमेगा स्टील में फीडर पद पर कार्यरत ब्रह्मसारी, सिकरीगंज निवासी रामहंस ने कहा कि घर आने की उम्मीद टूट चुकी थी, लेकिन भगवान का शुक्र है कि गांव पहुंच रहे हैं। सरकार ने बहुत मदद की। न केवल काल के गाल से सुरक्षित निकाला बल्कि पूरे सम्मान के साथ घर पहुंचा रही है। अब जिले में ही कोई रोजगार करूंगा। अपना देश नहीं छोड़ूंगा।
भारत माता के लगाए जयकारे
दिल्ली से सहजनवां पहुंचने वाली बस में सूडान से लाए गए गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर जनपद के कुल 31 लोग शामिल थे। बस से बाहर निकलते ही उन्होंने भारत माता, वंदे मातरम और मोदी-योगी जिंदाबाद के जयकारे लगाए। अफसरों ने माला पहना कर सभी का स्वागत किया और रेस्त्रां में नाश्ता कराया गया। फिर सभी को वाहनों से उनके घर भेजा गया। इस अवसर पर एडीएम वित्त व राजस्व राजेश सिंह, एसडीएम सुरेश राय, जिला आपदा अधिकारी गौतम गुप्ता, नायब तहसीलदार अमित सिंह, सूचना अधिकारी प्रशांत श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर-बस्ती मंडल के इन नागरिकों की हुई सूडान से वापसी
देवरिया : विनोद शाह, जितेंद्र गुप्ता, जितेंद्र कुमार चौरसिया, विकास प्रसाद, अजय कुमार कनौजिया, रविंद्र कुमार निषाद, दशरथ कुशवाहा, अर्जुन यादव, सत्य प्रकाश यादव, नागेंद्र निषाद, प्रमोद कुमार यादव, संतोष चौरसिया।
कुशीनगर : राणा प्रताप सिंह, राकेश यादव, विनोद कुमार शर्मा, मुरारी शर्मा, जितेंद्र सिंह, उमेश यादव, सतीश शर्मा, संतोष राजभर, राघवेंद्र यादव, बाबूलाल शर्मा, दिलीप गुप्ता, धर्मेंद्र मिश्रा, खुशबूद्दीन अंसारी।
गोरखपुर : मनीष गुप्ता, विजय बहादुर सिंह,, रामहंस, देवनारायण, जनार्दन त्रिपाठी।
सिद्धार्थनगर : महेंद्र।