'गलती कोई करे और उसकी सजा भुगते कोई।' यह लाइन देवरिया जिले के लाइन जेल में मां के साथ जुर्म की दुनिया में पल रहे बच्चों पर सटीक बैठ रही है। जेल में बंद 12 मासूमों को अपनी गलती का पता नहीं, लेकिन वह मजबूरी में मां के साथ सलाखों के पीछे कैद होकर जिंदगी गुजार रहे हैं। बच्चे अपनी मां के गुनाहों की सजा भुगत रहे हैं।
हत्या, लूट सहित अन्य अपराधों जैसे शब्दों से अंजान मासूमों अपने मम्मी-पापा के गुनाहों की सजा भुगत रहे हैं। जेल बंद कुछ ऐसे बच्चे भी हैं जो किशोरावस्था में आने का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि इसके बाद ही खुली हवा में शातिरों की दुनिया से बाहर होकर खुली हवा में सांस लेने का मौका उन्हें मिलेगा। जेल में बंद 12 मासूम में करीब आठ बच्चे पांच साल के अंदर हैं। जिनका बचपन स्कूल और घर के आंगन में नहीं जेल की आंगन में गुजर रहा है।
बंदी को पैदा हुआ बच्चा, परिजन देखने तक नहीं आए
कुशीनगर जनपद निवासी एक महिला बंदी को एक सप्ताह पहले बच्चा पैदा हुआ है। गर्भवस्था में जेल आने के बाद उसे जेल प्रशासन ने अस्पताल पहुंचाया। जहां बच्चा पैदा हुआ है। परिवारिक विवाद ऐसा है कि परिजन हाल तक पूछने नहीं आए। जेल प्रशासन को पूरी जिम्मेदारी उठा है।