10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के तहत कुल 400 कारीगरों व शिल्पियों का चयन किया गया है। इनमें 100 टेराकोटा शिल्पी शामिल हैं, शेष 300 रेडीमेड गारमेंट सेक्टर से जुड़े कारीगर। इनमें सर्वाधिक संख्या महिलाओं की है। इन्हें 25-25 की समूह में बांटकर एक विशेषज्ञ द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूर्ण होने पर सरकार की तरफ से निशुल्क टूलकिट भी दिया जाएगा।
पूंजी, प्रशिक्षण, टूलकिट सबकुछ दे रही योगी सरकार
कई पुरस्कार प्राप्त टेराकोटा शिल्पकार और इस विधा के मास्टर ट्रेनर राजन प्रजापति का कहना है कि ओडीओपी के तहत योगी सरकार सबकुछ दे रही है। कारोबार शुरू करने को पूंजी अनुदान मिल रहा है। हुनर निखारने को प्रशिक्षण और व्यवहारिक रूप में काम शुरू कर देने को टूलकिट भी। काम करने को बस लगन चाहिए, बाकी सबकुछ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओडीओपी योजना से मिल रहा है।
ओडीओपी में शामिल होने के बाद बढ़ा टेराकोटा का दायरा
एक दौर तक टेराकोटा का दायरा गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के औरंगाबाद व आसपास के कुछ गांवों तक सीमित था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे जिले का ओडीओपी घोषित कर इसके उन्नयन के प्रयास किए तो अब इसका दायरा बढ़ने लगा है। कुछ सालों से पादरी बाजार क्षेत्र में भी टेराकोटा का काम होने लगा है तो अब चौरीचौरा क्षेत्र के राजी राजधानी, जगदीशपुर में भी कुछ माटी कलाकारों ने टेराकोटा शिल्प में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। प्रशिक्षण से उनके हुनर में और निखार आएगा और ओडीओपी स्कीम में अनुदान से वह भी अपना कारोबार चमका सकेंगे।