16 जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें साल 2014 की तमिल फिल्म ' वेलैयिल्ला पट्टाथारी' के पोस्टरों के लिए अभिनेता धनुष और अन्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया था। इस पोस्टर में अभिनेता को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था।
इस मामले में एक निजी शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विज्ञापन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सिगरेट के उपयोग या उपभोग का सुझाव या प्रचार किया गया था। उच्च न्यायालय के पिछले साल 10 जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।
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पीठ का आदेश
पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'विज्ञापनों की प्रतियों का अध्ययन करने के बाद, हमारा विचार है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (1) 2003 इस मामले में लागू नहीं था। इसलिए, विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (सीओटीपीए) अधिनियम, 2003 के प्रावधान के तहत अपराध किया था।' अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने कहा था कि दंडात्मक कानून को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए क्योंकि कानून के तहत की गई कार्रवाई का परिणाम संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पड़ेगा।
प्रावधानों को सख्ती से समझना होगा
पीठ ने आगे कहा,"इसलिए अदालत को भावनाओं और लोकप्रिय मान्यताओं से प्रभावित नहीं किया जा सकता है और अदालत को प्रावधानों को सख्ती से समझना होगा और देखना होगा कि मामले के तथ्य अपराध बनाते हैं या नहीं। उच्च न्यायालय ने कहा था, "यदि तथ्य अपराध नहीं बनते हैं, तो अदालत तम्बाकू या तम्बाकू उत्पाद के समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव पर विचार करके प्रावधान के दायरे का विस्तार करने का प्रयास नहीं कर सकती है।"