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IC-814: 'आईसी-814' सीरीज विवाद में कंगना की एंट्री, कहा- सेंसरशिप केवल हम में से कुछ लोगों के लिए ही है

Mon, 02 Sep 2024 01:16 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

कंगना रणौत ने भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के एक एक्स पोस्ट को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक्ट्रेस ने कहा कि ऐसा लगता है कि सेंसरशिप केवल हममें से कुछ लोगों के लिए है, जो इस देश के टुकड़े नहीं चाहते हैं और ऐतिहासिक तथ्यों पर फिल्में बनाते हैं।
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'आईसी-814' -कंगना रणौत - फोटो : इंस्टाग्राम
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विस्तार
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अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी सीरीज  'आईसी-814' विवादों में हैं। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस सीरीज को लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट हेड को तलब किया गया है। विवाद दरअसल, इसमें दिखाए गए आतंकियों के किरदारों के नाम को लेकर है। सोशल मीडिया पर भी सीरीज को लेकर यूजर्स का गुस्सा फूट रहा है और इसे बायकॉट करने की मांग की जा रही है। इसके अलावा अभिनेत्री व भाजपा सांसद कंगना रणौत ने भी अब इस मसले पर प्रतिक्रिया दी है। 

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अमित मालवीय की पोस्ट पर दी प्रतिक्रिया
दरअसल, कंगना रणौत ने , भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के एक एक्स पोस्ट को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि आईसी-814 के हाईजैकर्स खूंखार आतंकी थे। उन्होंने अपनी मुस्लिम पहचान छिपाने के लिए काल्पनिक नाम अपनाए थे। मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया कि फिल्म निर्माता अनुभव सिन्हा ने उनके गैर-मुस्लिम नामों को आगे बढ़ाकर उनके नापाक इरादों को सही बनाने का काम किया है। दशकों बाद लोग सोचेंगे कि हिंदुओं ने आईसी-814 का अपहरण किया था। मालवीय ने कहा कि सभी आतंकी मुसलमान थे। अनुभव सिन्हा ने गलत काम को छिपाने के वामपंथियों के एजेंडे ने काम किया। यह सिनेमा की ताकत है, जिसका कम्युनिस्ट 70 के दशक से ही आक्रामक तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। शायद इससे भी पहले। उन्होंने कहा कि यह न भारत के सुरक्षा तंत्र को कमजोर करेगा, उस पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि उस वर्ग को निर्दोष करार देने का काम करेगा, जो इसके लिए जिम्मेदार था।
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अभिनेत्री ने जताई निराशा
कंगना रणौत ने अमित मालवीय का पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है, 'देश का कानून यह है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी परिणाम या सेंसरशिप के ओटीटी प्लेटफार्मों पर अकल्पनीय मात्रा में हिंसा और नग्नता दिखा सकता है। कोई भी व्यक्ति अपने राजनीतिक रूप से प्रेरित भयावह उद्देश्यों के हिसाब से वास्तविक जीवन की घटनाओं को विकृत भी कर सकता है। दुनियाभर में कम्युनिस्टों या वामपंथियों को इस तरह की राष्ट्र विरोधी अभिव्यक्ति के लिए पूरी आजादी है, लेकिन एक राष्ट्रवादी के रूप में कोई भी ओटीटी प्लेटफॉर्म हमें ऐसी फिल्में बनाने की इजाजत नहीं देता, जो भारत की अखंडता और एकता के इर्द-गिर्द घूमती हों। ऐसा लगता है कि सेंसरशिप केवल हममें से कुछ लोगों के लिए है, जो इस देश के टुकड़े नहीं चाहते हैं और ऐतिहासिक तथ्यों पर फिल्में बनाते हैं। यह बेहद निराशाजनक और अन्यायपूर्ण है'।
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क्या है मामला?
दरअसल,  काठमांडू से दिल्ली जा रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान को छह आतंकियों ने हाईजैक किया था। सभी आतंकी मुस्लिम थे। उनके नाम इब्राहिम अख्तर, शाहिद अख्तर, सन्नी, अहमद काजी, जहूर मिस्त्री और शाकिर थे, इस ओटीटी सीरीज में इन आतंकियों के किरदारों के नाम बदल दिए गए हैं। इसी पर विवाद खड़ा हो गया है। दर्शकों के बहुत बड़े वर्ग ने आतंकियों के 'मानवीय' चित्रण पर आपत्ति जताई है।
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