अध्ययन सुमन ने अपने करियर के मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यह ऐसा दौर था, जिसमें वह काफी कमजोर महसूस कर रहे थे। काम नहीं मिलने के कारण वह हार मान लेना चाहते थे।
शेखर सुमन और उनके बेटे अध्ययन सुमन की वेब सीरीज 'हीरामंडी' नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। इस सीरीज में अध्ययन ने जोरावर अली खान का किरदार निभाया है। दर्शक लंबे वक्त के बाद उन्हें अभिनय करते हुए देख रहे हैं। हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में अध्ययन ने उस दौर को लेकर कुछ बातें साझा की है, जब उनके पास कोई फिल्म नहीं थी और वह खाली बैठे थे।
विज्ञापन
हार मानना चाहते थे अध्ययन
इंडियन एक्सप्रेस को दिए साक्षात्कार में अध्ययन सुमन ने अपने करियर के मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि करियर की शुरुआत में सफलता तो मिली, लेकिन फिर लंबे वक्त तक कोई काम ही नहीं मिला। यह ऐसा दौर था, जिसमें वह काफी कमजोर महसूस कर रहे थे। काम नहीं मिलने के कारण वह हार मान लेना चाहते थे। हालांकि, संजय लीला भंसाली की सीरीज में काम मिलने से वह काफी खुश है। उन्हें उम्मीद है कि इससे लोगों का उनके प्रति नजरिया बदलेगा।
माता-पिता ने मुझे बिगाड़ दिया
अध्ययन ने आगे कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि उनके माता-पिता ने उन्हें बिगाड़ दिया है। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अध्ययन ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें ब्रिटेन में दुनिया के सबसे महंगे स्कूल में से एक में पढ़ाया है। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क फिल्म स्कूल में भी भेजा। वह अपने घर में अकेले रहते थे। न अपना घर और न ही कार को किसी के साथ साझा करते थे। अध्ययन ने कहा कि वह पिछले आठ सालों में आराम वाली जिंदगी जी सकते थे, लेकिन वही जानते हैं कि उस दौर में उन पर क्या बीत रही थी।
लग सकती थी ड्रग्स की लत
अध्ययन ने बताया कि उन्हें अपना चार मंजिला पेंटहाउस एक लग्जरी जेल की तरह लगता था। उन्हें इसमें कैद जैसा महसूस होता था। वह काम करके अपनी पहचान बनाने चाहते थे और माता-पिता को खुद पर गर्व महसूस कराना चाहते थे। हालांकि, ऐसा हो नहीं पा रहा था, जिससे वह मुश्किलों से घिर गए थे। उन्होंने बताया कि ऐसे खराब समय में वह ड्रग्स लेना शुरू कर सकते थे और शराबी भी बन सकते थे, लेकिन वह नशे से बचे रहे। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार में अकेले बच्चे हैं। उनके भाई अब इस दुनिया में नहीं है। इसलिए कोई भी गलत काम करके वह अपने माता-पिता को दुख नहीं देना चाहते थे।