अभिनेत्री और मॉडल सागरिका शोना ने उल्लू डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ विभु अग्रवाल और कंट्री हेड अंजलि रैना को दी गई अंतरिम अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए उपनगरीय मुंबई के दिंडोशी में मुंबई सत्र न्यायालय का रुख किया है। मीडिया से खास बातचीत करते हुए सागरीका ने कहा, ‘ विभु अग्रवाल को अंतरिम अग्रिम जमानत इसलिए मिल पाई क्योंकि अंबोली पुलिस शुरू से ही उनके पक्ष में हैं। जांच अधिकारी को प्रबंधित किया गया है।
सागरिका शोना ने आगे कहा, ‘मैंने पुलिस कमिश्नर और जेटी सीपी को लिखित में शिकायत दी थी लेकिन उस पर किसी भी तरह का एक्शन नहीं लिया गया। मुझे लगता है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए जांच अधिकारी के रूप में एक महिला पुलिस अधिकारी को ही नियुक्त किया जाना चाहिए। लेकिन इस केस में एक पुरुष अधिकारी को जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है जोकि सच में हैरान करने वाली बात है। जांच अधिकारी पहले दिन से समझौता कर रहे हैं। शिकायत दर्ज करने वाली पीड़ितों ने भी कई बार ये कहा है।
सागरिका ने शिकायत करते हुए कहा, ‘ये बिलकुल ही नया कांसेप्ट है। कई मामले ऐसे हैं जिसमें मैंने सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा दी गई गिरफ्तारी से अंतरिम राहत या फिर अंतरिम सुरक्षा के बारे में सुना है, लेकिन अंतरिम अग्रिम जमानत बिलकुल ही नया कांसेप्ट है। पुलिस और पब्लिक अभियोजक सभी को आरोपी द्वारा मैनेज किया जा रहा है। जिनकी जेब बड़ी होती है उन्हें हर तरह की राहत मिलती है। लेकिन छोटे से छोटे अपराध के लिए गरीब लोगों को महीनों महीनों जेल में रहना पड़ता है।
इस बीच, विभु अग्रवाल और अंजलि रैना को अपनी अंतरिम अग्रिम जमानत के तहत कल यानी की मंगलवार को 11 से 2 के बीच अंबोली पुलिस स्टेशन में हाजिर होना था। लेकिन वो पुलिस स्टेशन पहुंचे थे या नहीं ये पता नहीं चला। हालांकि इस मामले में शिकायतकर्ता ने बांद्रा स्थित कार्यालय में जाकर जोनल डीसीपी अभिषेक त्रिमूखे से लिखित शिकायत के साथ मंगलवार की शाम को मुलाकात की और अंबोली पुलिस द्वारा जांच में हुई चूक के बारे में सीनियर अधिकारी को बताया। जोनल डीसीपी अभिषेक त्रिमूखे ने उन्हें इस मामले में जांच करने का आश्वासन दिया।