इंडिया इंटरनेशनल फॉरेन टूरिज्म कॉन्क्लेव के 10वें संस्करण में इम्तियाज अली ने फिल्म निर्माण की यात्रा के कुछ अनुभव साझा किए। इम्तियाज अली ने 'लव आज कल', 'रॉकस्टार', 'कॉकटेल', 'तमाशा' और 'जब हैरी मेट सेजल' जैसी अपनी फिल्मों के शूटिंग स्पॉट्स को लेकर भी खुलकर बात की।
बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के शानदार निर्देशकों में शुमार इम्तियाज अली की फिल्में अक्सर लोगों के दिल को छू जाती हैं। फिर चाहे वह 'हाइवे' हो, 'जब वी मेट' हो या फिर 'रॉकस्टार' सभी फिल्मों की कहानी से लेकर उनकी शूटिंग लोकेशंस तक ने दर्शकों का मन मोह लिया था। इन सभी फिल्मों को शूट के दौरान इम्तियाज अली ने कैसे शूटिंग स्पॉट्स को चुना यह अपने आप में खास है। इस खास बात का खुलासा हाल ही में इम्तियाज अली ने इंडिया इंटरनेशनल फॉरेन टूरिज्म कॉन्क्लेव (आईआईएफटीसी) के 10वें संस्करण में किया।
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कैसे लिया 'तमाशा' में रणबीर का स्पेशल शॉट
इंडिया इंटरनेशनल फॉरेन टूरिज्म कॉन्क्लेव के 10वें संस्करण में इम्तियाज अली ने फिल्म निर्माण की यात्रा के कुछ अनुभव साझा किए। इम्तियाज अली ने 'लव आज कल', 'रॉकस्टार', 'कॉकटेल', 'तमाशा' और 'जब हैरी मेट सेजल' जैसी अपनी फिल्मों के शूटिंग स्पॉट्स को लेकर भी खुलकर बात की। निर्देशक ने कहा, 'मैं हमेशा नई लोकेशंस पर शूटिंग करना पसंद करता हूं और कोशिश करता हूं कि किसी स्थान या शॉट को रिपीट न करूं। फ्रांस के द्वीप कोर्सिका पर तमाशा की शूटिंग के दौरान रणबीर कपूर का एक चट्टान पर बैठा हुआ शॉट है। हमने शूटिंग के लिए स्पॉट पर पहुंचने के बाद उस स्पेशल शॉट पर निर्णय ले लिया था।'
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'हाईवे' के लिए पहले नहीं तय की गई लोकेशन
निर्देशक ने आलिया भट्ट स्टारर फिल्म 'हाईवे' का जिक्र किया और कहा, 'हाईवे एकमात्र ऐसी फिल्म थी - जहां हमने कभी किसी स्पॉट पर पहले जाकर नहीं देखा। हम बस अपनी फिल्म टीम के साथ सड़क पर उतरे और जब भी हमें अच्छे स्पॉट मिले, हमने रुककर शूटिंग की। हम ऐसा इसलिए कर सके क्योंकि हम अपने देश में शूटिंग कर रहे थे। विदेशी लोकेशंस पर बहुत से ऐसे नियम होते हैं, जो हमें ऐसा करने से रोकते हैं।'
इम्तियाज ने समझाई लोकेशन की महत्ता
इम्तियाज अली शूटिंग लोकेशन की महत्ता बताते हुए बोले, 'लोकेशन कहानी कहने का दिल हैं। मैं एक विचारोत्तेजक कहानी बनाने के लिए उन पर भरोसा करता हूं जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर सके। पृष्ठभूमि कहानी की गहराई में योगदान करते हुए भावना, इतिहास और माहौल को व्यक्त करने की शक्ति रखती हैं। भारतीय सिनेमा की अब यूनिवर्सल अपील है खासकर प्रवासी भारतीयों के बीच। जिस भी जगह पर हमने शूटिंग की थी उन सभी पर अभिनेताओं को देखने के लिए भीड़ जमा हो जाती थी।'
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