जीनत अमान ने उन दिनों को याद किया जब वे बोर्डिंग स्कूल में अपनी सहेलियों के साथ फिल्में देखने के लिए उत्साहित रहती थीं। इसके आलावा अभिनेत्री ने बताया कि वे दर्शकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए बुर्खा पहनकर सिनेमाघरों में जाती थीं।
गुजरे जमाने की दिग्गज अदाकारा जीनत अमान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। अभिनेत्री आए दिनों अपने पुराने किस्सों का पिटारा खोल फैंस के साथ अपनी यादें साझा करती रहती हैं। आज भी उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। जीनत अमान ने उन दिनों को याद किया जब वे बोर्डिंग स्कूल में अपनी सहेलियों के साथ फिल्में देखने के लिए उत्साहित रहती थीं। इसके आलावा अभिनेत्री ने बताया कि वे दर्शकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए बुर्खा पहनकर सिनेमाघरों में जाती थीं।
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फिल्में देखने के लिए उत्साहित रहती थीं अभिनेत्री
जीनत ने उन दिनों के बारे में खुलासा किया जब वे बोर्डिंग स्कूल में फिल्में देखती थीं। दिग्गज अभिनेत्री ने कहा, 'रविवार को पंचगनी में मेरे बोर्डिंग स्कूल में फिल्में दिखाई जाती थी। यह हमारे लिए मूवी डे होता था। हम लड़कियां फिल्में देखने के लिए उत्सुक रहती थीं। सिनेमा की दुनिया में जाने के लिए हम लोग अच्छे से तैयार होकर जाते थे। उस समय मैं पंद्रह वर्ष की थी, जब मुझे पहली बार सिल्वर स्क्रीन की ओर आकर्षित हुई। यह एक हॉलीवुड फिल्म थी, जिसका नाम द सिल्वर चालिस था। जब अभिनेता पॉल न्यूमैन स्क्रीन पर आए, तो मैं अपने दिल की धड़कन महसूस करने वाली एकमात्र लड़की नहीं थी।'
बुर्खा पहनकर सिनेमाघरों में जाती थीं जीनत
जीनत अमान ने आगे अपने शुरुआती फिल्मी करियर के बारे में बात करते हुए कहा, 'वर्षों बाद मैं हिंदी सिनेमा में आई। हालांकि, कैमरे के सामने अभिनय करने में एक अलग आनंद है, लेकिन मुझे दर्शकों की सादगी ज्यादा पसंद है। एक कलाकार के रूप में अपने शुरुआती वर्षों में दर्शकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए मैं अपनी फिल्मों को सिनेमाघरों में देखने जाती थी। हालांकि, मैं अपनी पहचान को छुपाकर दर्शकों के बीच जाती थी। अक्सर मैं अपनी पहचान छुपाने के लिए बुर्खा पहनती थी। मैं सिनेमा में फिल्म शुरू होने के बाद, और भीड़ से बचने के लिए जल्दी बाहर निकल जाती थी।'
उस समय सिनेमा में फिल्में देखना रोमांचक था
उन्होंने कहा कि आज के समय में सभी फिल्में ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, इसलिए सिनेमाघरों में फिल्में देखने का उत्साह कम हो गया है। उन दिनों दर्शक फिल्में देखने सिनेमाघरों में जाते थे। मेरे पुराने दोस्तों और फैंस को याद होगा कि उस समय सिनेमा जाना कितना नया, रोमांचक और मनोरंजक हुआ करता था, तब फिल्में देखने का आनंद ही अलग था।