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AR Rahman: पुराने दिनों को याद कर भावुक हुए एआर रहमान, बोले- जिस दिन मां ने अपने गहने बेचे, उसी एक पल में...

Wed, 15 May 2024 10:11 AM IST
अनुपमा कुमारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

एआर रहमान कहते हैं, 'मैं कालेज नहीं गया कभी इसलिए मेरे पास बहुत सारे सवाल हुआ करते थे। मैं हमेशा अपनी उम्र से ज्यादा उम्र वालों से मिला और उनसे जिंदगी से जुड़ी बातें सीखी'।
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एआर रहमान - फोटो : इंस्टाग्राम
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विस्तार
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बॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार एआर रहमान इन दिनों सुर्खियों में हैं। हाल ही में रिलीज हुई म्यूजिकल फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' का संगीत उन्होंने ही दिया। इस फिल्म के अलावा वे अजय देवगन की फिल्म 'मैदान' में भी अपने संगीत का जलवा बिखेरते नजर आए। आज एआर रहमान करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं, लेकिन एक वक्त था जब वे पाई-पाई के मोहताज हुआ करते थे। पिछले दिनों एक इंटरव्यू के दौरान वे खुद अपने बचपन और आर्थिक तंगी के बारे में खुलकर बातें करते दिखाई दिए। 
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कॉलेज न जाने का गम 
इम्तियाज अली की फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' के गाने आज हर किसी के जबान पर है और इस बात का क्रेडिट एआर रहमान को जाता है। एआर रहमान पिछले दिनों अपने बचपन के दिनों को याद कर भावुक होते दिखाई दिए। एआर रहमान कहते हैं, 'मैं कालेज नहीं गया कभी इसलिए मेरे पास बहुत सारे सवाल हुआ करते थे। मैं हमेशा अपनी उम्र से ज्यादा उम्र वालों से मिला और उनसे जिंदगी से जुड़ी बातें सीखी। मुझे कालेज नहीं जाने का अफसोस पहले होता था, लेकिन बाद में जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है मैंने कितना कुछ सीखा है'। 

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मां ने गहने बेच दिए 
एआर रहमान अपनी बात जारी रखते हुए कहते हैं, 'जब मैंने अपना स्टूडियो बनाया तब मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं एक ढंग के स्टूडियो का निर्माण कर सकूं। मेरी मां ने मेरे पहला रिकॉर्डर खरीदने के लिए अपने गहने बेच दिए। उस एक पल में मेरे सबकुछ बदल गया था। मैंने जब अपना स्टूडियो बनाया तब मेरे पास एम्पलीफायर या इक्वलाइजर खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। मैंने सिर्फ एक शेल्फ और कालीन के साथ अपने स्टूडियो को बनाया था'। 
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तय कर लिया था हालात को बदलना होगा 
आज एआर रहमान के संगीत के दीवाने सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हैं। वे जिस भी फिल्म में संगीत देते हैं यह माना जाता है कि फिल्म संगीत के बदलौत हिट कर जाएगी, लेकिन हमेशा से एआर रहमान के हालात ऐसे नहीं थे। एआर रहमान कहते हैं, 'मैं वहां अपने स्टूडियो बैठा रहता था और मेरे पास कुछ भी खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे। मैं सोचता रहता था कि मैंने स्टूडियो तो बना लिया है अब क्या करूं। जिस दिन मां ने अपने गहने गिरवी रखकर मेरे लिए रिकॉर्डर खरीदा था उसी दिन मैंने सोच लिया था अब सबकुछ बदल जाएगा। मैंने उस एक पल में खुद को सशक्त महसूस किया था और अपने भविष्य को भी देखा था। मैंने तय किया कि अब हालात को बदलना ही होगा'। 
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