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Lok Sabha Election: हाथरस से सपा ने उतारा अनजान-अपरिचित चेहरा, सहारनपुर के जसवीर वाल्मीकि पर खेला दांव

Fri, 15 Mar 2024 10:08 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

सपा की सूची ने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चौकाया है और वे जसवीर वाल्मीकि के बारे में जानकारी करते नजर आए। सोशल मीडिया पर भी उन्हें सर्च किया गया। बाद में पता चला कि वह सहारनपुर में देवबंद के रहने वाले हैं। यहां से कई स्थानीय दावेदार भी सक्रिय थे।
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हाथरस की सुरक्षित लोकसभा सीट से सपा प्रत्याशी जसवीर वाल्मीकि - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी ने हाथरस की सुरक्षित लोकसभा सीट से जसवीर वाल्मीकि को प्रत्याशी घोषित किया है। वह सहारनपुर के रहने वाले हैं। हाथरस के लिए अपरिचित और अनजान चेहरा उतारकर सपा ने सभी को चौकाया है।

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हालांकि सपा की सूची ने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चौकाया है और वे जसवीर वाल्मीकि के बारे में जानकारी करते नजर आए। सोशल मीडिया पर भी उन्हें सर्च किया गया। बाद में पता चला कि वह सहारनपुर में देवबंद के रहने वाले हैं। यहां से कई स्थानीय दावेदार भी सक्रिय थे। 2014 और 2019 में यहां से सपा के वरिष्ठ नेता रामजीलाल सुमन प्रत्याशी थे। दोनों बार भाजपा ने यह सीट जीत ली थी। हाल ही में हुआ राज्यसभा सदस्य के चुनाव में सपा ने रामजीलाल सुमन को राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किया था। सपा के इस चुनाव में जो दो प्रत्याशी चुनाव जीते, उनमें रामजीलाल सुमन भी हैं। उनके राज्यसभा में जाने के साथ ही यह साफ हो गया था कि यहां से पार्टी इस बार उन्हें प्रत्याशी नहीं बना रही है। ऐसे में तमाम दावेदार सक्रिय थे, लेकिन उन्हें दरकिनार कर सपा ने सहारनपुर से जसवीर वाल्मीकि को प्रत्याशी घोषित किया है। सपा की घोषणा के बाद अन्य पार्टियों में हलचल शुरू हो गई है। स्थानीय दावेदारों की जगह 300 किलोमीटर दूर के निवासी को प्रत्याशी बनाए जाने पर सपा के साथ ही अन्य पार्टियों के पदाधिकारी भी गणित लगाने में जुट गए हैं।

विधान सभा चुनाव में गठबंधन के बाद बदल दिया था जसवीर का टिकट
समाजवादी पार्टी से हाथरस से प्रत्याशी बनाए गए जसवीर वाल्मीकि 2017 के विधान सभा चुनाव में सहारनपुर की सुरक्षित सीट रामपुर मनिहारान से प्रत्याशी बनाया था। बाद में गठबंधन में यह सीट चली गई थी और वह चुनाव नहीं लड़ पाए थे। जसवीर वाल्मीकि मूलरुप से जनपद मुजफ्फरनगर के कस्बा पुरकाजी के रहने वाले हैं और वर्तमान में परिवार के साथ देवबन्द में रह रहे हैं। वह काफी समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। जसवीर को सपा ने फिलहाल उन्हें रामपुर मनिहारान विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया हुआ है। वह सपा के प्रदेश सचिव भी हैं।2010 से 2014 तक पार्टी के अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष रहे हैं। मुजफ्फरनगर के रोहाना में उनका कपड़े का शोरूम है।

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33 साल से है इस सीट पर भाजपा का कब्जा

सपा के प्रत्याशी घोषित करते ही राजनीतिक पंडितों ने अपने-अपने गणित लगाना शुरू कर दिया है। इस सीट पर 1991 से भाजपा का कब्जा है। 2019 के चुनाव में सपा दूसरे स्थान पर रही थी। 2009 में यह सीट भाजपा- रालोद गठबंधन में रालोद को दी गई थी और तब भी इस सीट पर रालोद की सारिका बघेल ने जीत दर्ज की थी। 1991 में मध्यावधि चुनाव में राम लहर में भाजपा से लाल बहादुर रावल ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1996 में भाजपा के किशन लाल दिलेर जीते थे। 1998 में ,1999 में , 2004 में फिर से किशन लाल दिलेर ने जीत हासिल की। 2014 में राजेश दिवाकर और 2019 में किशन दिलेर के पुत्र राजवीर दिलेर ने जीत हासिल की थी। पिछले चुनाव की बात करें तो सपा ने रामजीलाल सुमन को लोकसभा सीट से उतारा था, लेकिन 260208 वोटों से भाजपा प्रत्याशी से हार गए थे। तब सपा, रालोद और बसपा के बीच गठबंधन था। सपा को 424091 वोट मिले थे, जबकि भाजपा से राजवीर दिलेर को 684299 वोट मिले थे। इस बार सपा का गठबंधन कांग्रेस है, अगर पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस प्रत्याशी त्रिलोकी राम दिवाकर को महज 23926 वोट मिले थे।

भाजपा से कौन होगा प्रत्याशी चर्चा शुरू
सपा ने लोकसभा चुनाव में सबसे पहले प्रत्याशी की घोषणा कर अन्य राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। भाजपा की दो सूची जारी होने के बाद भी यहां लोकसभा सीट से प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। सपा के वाल्मीकि प्रत्याशी को मैदान में उतार कर भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि अब भाजपा वाल्मीकि प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारेगी या नहीं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन पर भरोसा करके हाथरस से प्रत्याशी बनाया है, यह उनके लिए खुशी की बात है। मजबूती के साथ चुनाव लड़ा जाएगा।-जसवीर वाल्मीकि, प्रत्याशी समाजवादी पार्टी हाथरस
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