सपा के प्रत्याशी घोषित करते ही राजनीतिक पंडितों ने अपने-अपने गणित लगाना शुरू कर दिया है। इस सीट पर 1991 से भाजपा का कब्जा है। 2019 के चुनाव में सपा दूसरे स्थान पर रही थी। 2009 में यह सीट भाजपा- रालोद गठबंधन में रालोद को दी गई थी और तब भी इस सीट पर रालोद की सारिका बघेल ने जीत दर्ज की थी। 1991 में मध्यावधि चुनाव में राम लहर में भाजपा से लाल बहादुर रावल ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1996 में भाजपा के किशन लाल दिलेर जीते थे। 1998 में ,1999 में , 2004 में फिर से किशन लाल दिलेर ने जीत हासिल की। 2014 में राजेश दिवाकर और 2019 में किशन दिलेर के पुत्र राजवीर दिलेर ने जीत हासिल की थी। पिछले चुनाव की बात करें तो सपा ने रामजीलाल सुमन को लोकसभा सीट से उतारा था, लेकिन 260208 वोटों से भाजपा प्रत्याशी से हार गए थे। तब सपा, रालोद और बसपा के बीच गठबंधन था। सपा को 424091 वोट मिले थे, जबकि भाजपा से राजवीर दिलेर को 684299 वोट मिले थे। इस बार सपा का गठबंधन कांग्रेस है, अगर पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस प्रत्याशी त्रिलोकी राम दिवाकर को महज 23926 वोट मिले थे।
भाजपा से कौन होगा प्रत्याशी चर्चा शुरू
सपा ने लोकसभा चुनाव में सबसे पहले प्रत्याशी की घोषणा कर अन्य राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। भाजपा की दो सूची जारी होने के बाद भी यहां लोकसभा सीट से प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हो सकी है। सपा के वाल्मीकि प्रत्याशी को मैदान में उतार कर भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि अब भाजपा वाल्मीकि प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारेगी या नहीं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन पर भरोसा करके हाथरस से प्रत्याशी बनाया है, यह उनके लिए खुशी की बात है। मजबूती के साथ चुनाव लड़ा जाएगा।-जसवीर वाल्मीकि, प्रत्याशी समाजवादी पार्टी हाथरस