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Elections 2024: भाजपा सिक्किम में अकेले ठोकेगी ताल, SKM के साथ टूटा गठबंधन; चुनाव बाद साथ आने के दरवाजे खुले

Sat, 23 Mar 2024 10:01 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक (सिक्किम)

सार

पूर्वोत्तर भारतीय प्रदेश सिक्किम में भाजपा अकेले चुनाव लड़ेगी। पार्टी ने कहा है कि सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) के साथ उसका कोई गठबंधन नहीं है। हालांकि, एसकेएम ने चुनाव बाद गठबंधन का विकल्प खुला खा है।
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सिक्किम के सीएम और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा - फोटो : social media
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विस्तार
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भाजपा ने सिक्किम में लोकसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ने का फैसला लिया है। सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के साथ अपना गठबंधन तोड़ने का एलान करते हुए भाजपा ने कहा कि लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में भी एसकेएम के साथ गठबंधन नहीं होगा। अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा होने के बाद एसकेएम ने कहा कि चुनाव के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन हो सकता है। गठबंधन तोड़ने की भाजपा की घोषणा के बावजूद एसकेएम ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 की तर्ज पर दोनों दलों के बीच समान व्यवस्था एक बार फिर बन सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा और एसकेएम दोनों अगले कुछ दिनों के भीतर अपने उम्मीदवारों की सूची की घोषणा कर सकते हैं।
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गठबंधन खत्म होने से सिक्किम की सियासत पर क्या असर होगा?
फैसले के बारे में सिक्किम में भाजपा अध्यक्ष डीआर थापा बताया कि एसकेएम के साथ सीट बंटवारे पर दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक हुई। दिल्ली से सिक्किम लौटने के बाद थापा ने कहा, भ्रष्टाचार के खिलाफ स्वतंत्र कार्रवाई और सिक्किम के विकास के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। एक नया युग शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि गठबंधन खत्म होने से राज्य के लोगों के हितों की रक्षा और सेवा का बड़ा अवसर मिलेगा।

चुनाव के बाद भी संभव है गठबंधन, 2019 की याद दिलाकर बोले सीएम के राजनीतिक सचिव
सिक्किम भाजपा प्रमुख थापा ने कहा, भाजपा की राज्य इकाई राज्य की सभी 32 विधानसभा सीटों और एकमात्र लोकसभा सीट पर अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। भाजपा की इस घोषणा के बाद एसकेएम नेता जैकब खालिंग राय ने कहा, पिछले चुनाव में हमने भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं किया था, लेकिन हमने चुनाव के बाद देश और राज्य के हित में गठबंधन किया। खालिंग सीएम के राजनीतिक सचिव भी हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी चुनाव के बाद गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं।
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भाजपा और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के बीच क्यों नहीं बन पाई सहमति
उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर आगे बढ़ने के लिए भाजपा को बधाई भी दी। सूत्रों ने कहा कि सीट बंटवारे पर एसकेएम और भाजपा के बीच बातचीत इसलिए नहीं बनी क्योंकि मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भगवा पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि तमांग ने हाल ही में भाजपा नेताओं के साथ सीट-बंटवारे पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी का दौरा भी किया था। हालांकि, सहमति बन नहीं पाई।

संविधान के अनुच्छेद 371एफ से भी जुड़ा है मामला
सूत्रों के मुताबिक दोनों दलों के बीच गठबंधन की पूरी उम्मीद थी, लेकिन एसकेएम ने उत्साह नहीं दिखाया। उन्हें डर था कि विपक्षी दल- सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट और सिटीजन एक्शन पार्टी, देश के संविधान के अनुच्छेद 371एफ को प्रभावित कर सकते हैं। कथित तौर इस प्रावधान को कमजोर करने पर सिक्किम में उप-राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिए जाने की आशंका थी। संविधान का यह प्रावधान राज्य को विशेष दर्जा की गारंटी देता है। इसके प्रभाव से उसके पुराने कानूनों की रक्षा भी होती है। 1975 में भारत के साथ विलय के समय पहले से मौजूद कई कानूनी प्रावधानों से आज भी सिक्किम को खास दर्जा मिलता है।
    
सिक्किम का सियासी समीकरण
दोनों पार्टियों ने 2019 का चुनाव अलग-अलग लड़ा था। एसकेएम ने 17 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। दूसरी ओर, भाजपा को दो प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे। एसडीएफ से दलबदल कर भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों की संख्या अचानक 10 हो गई। इसके बाद एसकेएम और भाजपा ने चुनाव बाद गठबंधन का फैसला लिया।

एकमात्र राज्यसभा सीट भी भाजपा की झोली में गई
एसडीएफ के दो विधायकों ने एसकेएम का दामन थामा था। इससे उसकी सीटों की संख्या 19 तक पहुंच गई। बाद में कराए गए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने दो सीटें जीतीं। इससे कुल विधायकों की संख्या 12 हो गई। सिक्किम में पैर जमा रही भाजपा को एकमात्र राज्यसभा सीट जीतने में भी सफलता मिली। इसी साल जनवरी में डीटी लेप्चा राज्यसभा सदस्य बने। 
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