पुलिस कार्यालयों के बाहर उसके अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन आम बात है। पर, किसी पुलिस अधिकारी के समर्थन में पुलिस मुख्यालय पर भीड़ जुटना फिल्मों में दिखता है या फिर 26 जुलाई, 2016 को कर्नाटक के उडुपी में देखने को मिला। उस वक्त लोग युवा आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई कुप्पुसामी के तबादले का विरोध करने के लिए जुटे थे।
2011 में 23 वर्ष की उम्र में पहली बार में ही संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 244वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अफसर बने अन्नामलाई को कर्नाटक का सिंघम कहा जाने लगा था। मई, 2019 में उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ दी। अगस्त, 2020 में तमिलनाडु भाजपा में शामिल हुए, जुलाई, 2021 में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट के वकील जे साई दीपक सहित कई राजनीतिक समीक्षक अन्नामलाई की तुलना अपने दौर में कांग्रेस के किंगमेकर रहे के कामराज से करते हैं। फिलहाल, वे तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष ही नहीं हैं, बल्कि दक्षिण का किला भेदने के लिए सबसे बड़ा हथियार भी हैं। भाजपा ने उन्हें कोयंबटूर से उम्मीदवार बनाया है। नमक्कल में साधारण परिवार में 1984 में जन्मे अन्नामलाई की स्कूली शिक्षा करूर में हुई है। कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। लखनऊ में भारतीय प्रबंध संस्थान से स्नातकोत्तर किया।
सुरक्षा एप से पुलिस-जनता की दूरी पाटी
2015 में अन्नामलाई उडुपी के एसपी थे, तब उन्होंने जनता और पुलिस के बीच दूरी खत्म करने, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सुरक्षा नाम से एक एप पेश किया। इसके जरिये कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज कर सकता है और उस शिकायत पर क्या काम हो रहा है यह देख सकता था। एक निडर अधिकारी के तौर पर उन्होंने 2017 में चिकमंगलूर में सांप्रदायिक दंगा होने से रोका। मुस्लिम समुदाय को कुरान और हदीस के हवाले से बातें कर समझाया और शहर में कुछ दिनों के भीतर ही शांति कायम हो गई। इसकी देशभर में चर्चा हुई।
लक्ष्य
अन्नामलाई की तमिलनाडु में छवि ऐसे तेज-तर्रार नेता की है, जिसमें लोग वहां पहली बार किसी गैर द्रविड़वादी दल की सरकार बनाने का माद्दा देखते हैं। पिछले साल उन्होंने कहा भी था कि वे फिलहाल विधायक या सांसद बनने के बजाय संगठन के विस्तार और राज्य में भाजपा की मजबूती के लिए काम करना चाहते हैं। साथ ही राज्य को संकुचित राजनीति से मुक्त कराना उनका मकसद है।