चरण सिंह बीजू पटनायक को देखने आरएमएल अस्पताल जा रहे थे। वहां से लौटते हुए उन्हें इंदिरा के आवास पर रुकना था, लेकिन इसी बीच किसी ने उन्हें सलाह दी कि अब आप प्रधानमंत्री हैं और इंदिरा के घर न जाएं।
दिसंबर, 1977। पद के दुरुपयोग का आरोप लगाकर जनता सरकार ने इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता छीन ली। पूर्व पीएम को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। जेल से ही इंदिरा ने 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह को जन्मदिन पर फूलों का गुलदस्ता भिजवाया। सप्ताह भर में इंदिरा रिहा हो गईं और चरण सिंह ने उन्हें घर पर आमंत्रित किया। इंदिरा पहुंचीं तो उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ।
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चरण सिंह मोरारजी देसाई को संदेश देना चाह रहे थे कि जरूरत पड़ने पर वह इंदिरा का साथ लेने से गुरेज नहीं करेंगे। वहीं, इंदिरा भी जताना चाह रही थीं कि जनता पार्टी के असंतुष्ट नेताओं के साथ मिलकर उनके सामने समस्या खड़ी कर सकती हैं। खैर, इस मुलाकात का परिणाम जल्द देखने को मिला। मोरारजी देसाई का प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा हुआ और चरण सिंह बने नए प्रधानमंत्री। शपथग्रहण के बाद चरण सिंह ने इंदिरा को फोन कर कहा, वह आभार प्रकट करने उनके निवास पर आएंगे। जल्द ही वह दिन भी आया जब चरण सिंह के इंदिरा के घर जाने की योजना बनी।
चरण सिंह बीजू पटनायक को देखने आरएमएल अस्पताल जा रहे थे। वहां से लौटते हुए उन्हें इंदिरा के आवास पर रुकना था, लेकिन इसी बीच किसी ने उन्हें सलाह दी कि अब आप प्रधानमंत्री हैं और इंदिरा के घर न जाएं। बस फिर क्या था, इंदिरा हाथ में गुलदस्ता लिए चरण सिंह का इंतजार करती रहीं और उनकी आंखों के सामने से चरण सिंह का काफिला गुजर गया। यह इंदिरा को बेहद नागवार गुजरा। गुलदस्ता जमीन पर फेंकते हुए तमतमाई इंदिरा अपने घर के अंदर चली गईं। बाद में चरण सिंह को यह बात पता चली, उन्होंने भूल-सुधार की कोशिश भी की, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चरण सिंह के पीएम बनने के तीन सप्ताह बाद ही इंदिरा ने उनकी सरकार से समर्थन वापस ले लिया।