समाजवादी पार्टी की बुधवार देर शाम को जारी हुई प्रत्याशियों की सूची ने उत्तर प्रदेश के कई सियासी कयासों पर विराम लगा दिया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सीट पीलीभीत की रही। जिस पर समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित कर वरुण गांधी के समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने की अटकलें खारिज कर दी। यही नहीं समाजवादी पार्टी ने मिर्जापुर से अपना दल की दावेदारी को भी खारिज कर दिया। सियासी जानकारों का कहना है कि फिलहाल वरुण गांधी को लेकर जब तक भारतीय जनता पार्टी अपने पत्ते नहीं खोलती तब तक अटकलें तो लगती ही रहेंगी।
समाजवादी पार्टी ने बुधवार देर शाम को 6 प्रत्याशियों की घोषणा की। इसमें पीलीभीत और मिर्जापुर जैसी वह सीटें भी शामिल थीं, जिस पर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अखिलेश यादव ने पीलीभीत से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर भगवत शरण गंगवार का नाम घोषित कर दिया। भगवत शरण का नाम घोषित करते ही पीलीभीत से वरुण गांधी के समाजवादी पार्टी या INDIA गठबंधन से चुनाव लड़ने के सभी कयास बंद हो गए।
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार मनोज कनौजिया कहते हैं कि पीलीभीत से सपा की प्रत्याशी की घोषणा बताती है कि अभी तक जो कयास चल रहे थे वह महज हवा में थे। हालांकि, मनोज मानते हैं कि अगर वरुण गांधी की ओर से टिकट के लिए समाजवादी पार्टी से कोई संपर्क होता तो कुछ संभावनाए बनती। लेकिन ऐसा कुछ निश्चित तौर पर नहीं हुआ होगा।
समाजवादी पार्टी ने सिर्फ पीलीभीत से प्रत्याशी घोषित कर कयासों पर विराम नहीं लगाया, बल्कि मिर्जापुर से भी प्रत्याशी उतार कर पल्लवी पटेल को झटका दिया है। अखिलेश यादव ने मीरजापुर से राजेंद्र बिंद को प्रत्याशी बनाकर अपना दल (क) को झटका दिया है। पहले चर्चा यही हो रही थी कि गठबंधन के तहत यह सीटें अपना दल (कमेरावादी) के हिस्से आ सकती हैं।
हालांकि, बुधवार को ही पल्लवी पटेल ने फूलपुर, कौशांबी और मीरजापुर से अपने प्रत्याशियों के उतारने की घोषणा कर दी थी। उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में अब चर्चाएं इस बात की हो रही है कि अगर वरुण गांधी को पीलीभीत से टिकट नहीं मिलता है तो क्या वह निर्दलीय पीलीभीत से ही चुनाव लड़ेंगे या कोई अन्य सीट पर जाकर अपनी दावेदारी ठोकेंगे।
राजनीतिक विश्लेषक मनोज कनौजिया कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की सियासत में अभी कई बड़े दांव देखे जाने बाकी है। वह कहते हैं अभी एक प्रयास जो लगातार सियासी गलियारों में चल रहा है कि वरुण गांधी क्या अमेठी से निर्दलीय प्रत्याशी हो सकते हैं। एक बात यह भी कही जा रही है कि वरुण गांधी के प्रतिनिधि ने उनके लिए पीलीभीत से पर्चा भरे जाने की सारी प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं। सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव की ओर से पीलीभीत में प्रत्याशी घोषित किया किए जाने से वरुण गांधी को लेकर काफी हद तक तस्वीर स्पष्ट हो चुकी है। लेकिन पूरी पिक्चर तभी साफ होगी जब भारतीय जनता पार्टी अपने प्रत्याशी घोषित करेगी।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों की माने तो उत्तर प्रदेश में अभी भी कई तरह के सियासी दांव पेंच देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक जानकार नसीरुद्दीन सिद्दीकी कहते हैं कि अभी तक बसपा सुप्रीमों मायावती ने कई पत्ते नहीं खोले हैं। ज्यादातर सीटों पर मायावती को प्रत्याशी उतारने हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं अभी भी उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में बसपा का INDIA गठबंधन के साथ करार के कयास लगाए जा रहे हैं। सियासी गलियारों में कहा यही जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी चुनाव से कई महीने पहले ही एक तरह से अपने प्रत्याशी घोषित कर देती थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। इसको लेकर भी कई तरह की अटकलें लग रही हैं। चर्चाएं इस बात की हो रही हैं कि कांग्रेस अभी भी मायावती से गठबंधन की कोशिश में लगी है।