उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीटें रायबरेली और अमेठी से कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। पार्टी ने शुक्रवार को नामांकन के आखिरी दिन उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस बार रायबरेली सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि अमेठी सीट पर पार्टी ने किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। किशोरी लाल को सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है। वे पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि राहुल गांधी इससे पहले अमेठी सीट से चुनाव लड़ते आए हैं। इससे पहले चर्चा थी कि अमेठी से राहुल गांधी चुनाव लड़ेंगे और रायबरेली से प्रियंका गांधी चुनावी मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि, पार्टी ने अचानक रणनीति बदली और दोनों सीटों पर नए चेहरे उतारने का फैसला लिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे पार्टी की एक बड़ी चाल के रूप में बताया है। रमेश ने कहा कि राहुल राजनीति और शतरंज के मंजे हुए खिलाड़ी हैं। सोच-समझ कर दांव चलते हैं। प्रियंका गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर झूठ का जवाब सच से देकर उनकी बोलती बंद कर रही हैं, इसलिए यह जरूरी था कि उन्हें सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र तक सीमित न रखा जाए। प्रियंका गांधी तो कोई भी उपचुनाव लड़कर सदन पहुंच जाएंगी।
इधर, शुक्रवार सुबह जैसे ही राहुल गांधी के रायबरेली की उम्मीदवारी की घोषणा हुई, वैसे ही भाजपा ने उन पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर हमला बोला है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के बर्धमान में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ने से डर गए हैं। यही वजह है कि उन्होंने इस बार अमेठी की जगह रायबरेली से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राहुल गांधी से पहले सोनिया गांधी भी डरकर राजस्थान चली गई थीं। कांग्रेस अब जिस स्थिति में है, उससे ये तो साफ है कि उनकी इस बार पहले से भी कम सीटें आ रही हैं। मैंने पहले से ही बता दिया था कि शहजादे वायनाड में हार के डर से अपने लिए दूसरी सीट खोज रहे हैं। अब इन्हें अमेठी से भागकर रायबरेली सीट चुननी पड़ी है। ये लोग घूम-घूम कर सबको कहते हैं- डरो मत! मैं भी इन्हें यही कहूंगा- डरो मत! भागो मत!
दरअसल, सोनिया गांधी अब तक रायबरेली से सांसद थीं, लेकिन इस बार वे यहां से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रही हैं। वे अब राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। उनकी जगह इस बार राहुल गांधी मैदान में हैं। राहुल गांधी रायबरेली से चुनावी मैदान में क्यों उतरे इस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रणनीति बताई है। जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी की रायबरेली से चुनाव लड़ने की खबर पर लोग तमाम तरह की राय दे रहे हैं। लेकिन वह राजनीति और शतरंज के मंजे हुए खिलाड़ी हैं। सोच समझ कर दांव चलते हैं। ऐसा निर्णय पार्टी के नेतृत्व ने बहुत विचार विमर्श करके बड़ी रणनीति के तहत लिया है। इस निर्णय से भाजपा, उनके समर्थक और चापलूस ढेर हो गये हैं। बेचारे स्वयंभू चाणक्य जो 'परंपरागत सीट' की बात करते थे, उनको समझ नहीं आ रहा अब क्या करें?
जयराम रमेश कहते हैं कि रायबरेली सिर्फ सोनिया गांधी की नहीं, खुद इंदिरा गांधी की सीट रही है। यह विरासत नहीं, जिम्मेदारी है, कर्तव्य है। रही बात गांधी परिवार के गढ़ की, तो अमेठी-रायबरेली ही नहीं, उत्तर से दक्षिण तक पूरा देश गांधी परिवार का गढ़ है। राहुल गांधी तो तीन बार उत्तर प्रदेश से और एक बार केरल से सांसद बन गए, लेकिन मोदी जी विंध्याचल से नीचे जाकर चुनाव लड़ने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाए? एक बात और साफ है कि कांग्रेस परिवार लाखों कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं उनकी आकांक्षाओं का परिवार है। कांग्रेस का एक साधारण कार्यकर्ता ही बड़ों-बड़ों पर भारी है। कल एक मूर्धन्य पत्रकार अमेठी के किसी कार्यकर्ता से व्यंग में कह रही थीं कि आप लोगों का नंबर कब आएगा टिकट मिलने का? लीजिए, आ गया। कांग्रेस का एक आम कार्यकर्ता अमेठी में भाजपा का भ्रम और दंभ दोनों तोड़ेगा।
कांग्रेस नेता आगे कहते हैं कि प्रियंका गांधी धुआंधार प्रचार कर रही हैं और अकेली नरेंद्र मोदी के हर झूठ का जवाब सच से देकर, उनकी बोलती बंद कर रही हैं, इसलिए यह जरूरी था कि उन्हें सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र तक सीमित न रखा जाए। प्रियंका गांधी तो कोई भी उपचुनाव लड़कर सदन पहुंच जाएंगी। आज स्मृति ईरानी की सिर्फ यही पहचान है कि वो राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ती हैं। अब स्मृति ईरानी से वो शोहरत भी छिन गई। अब बजाय व्यर्थ की बयानबाजी के स्मृति ईरानी स्थानीय विकास के बारे में जवाब दें, जो बंद किए अस्पताल, स्टील प्लांट और आईआईटी हैं, उस पर जवाब देना होगा। शतरंज की कुछ चालें बाकी हैं, थोड़ा इंतजार कीजिए।