सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थिति के आधार पर बनेगा पाठ्यक्रम
इस पाठ्यक्रम को राज्य की सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए हुए तैयार किया जा रहा है। अगले शैक्षणिक सत्र 2022-23 से इसे शुरू करने की तैयारी है। हमने पांच सदस्यों की रिव्यू कमेटी बनाई थी, जिसने पिछले महीने 23 से 26 नवंबर, 2021 मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत कई राज्यों में शुरू हुए हैप्पीनेस करिकुलम की समीक्षा की थी। हमने यह देखा कि उत्तर प्रदेश में क्या अलग करेंगे? क्योंकि उत्तर प्रदेश की भौगोलिक रचना ज्यादा विस्तृत है। उत्तर प्रदेश में अनुभूति पाठ्यचर्या शुरू करेंगे।
यह अनुभूति पाठ्यचर्या पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक अंर्त-संबंधों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखने और आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगी। - डॉ सौरभ मालवीय, राज्य प्रभारी, अनुभूति पाठ्यचर्या
अनुभूति पाठ्यचर्या में क्या सीखेंगे छात्र ?
पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए अनुभूति पाठ्यचर्या शुरू की जा रही है। इसमें छात्र चिंतन करेंगे। अनुभूति पाठ्यचर्या के माध्यम से समाज, प्रकृति, परिवार और देश के साथ विद्यार्थियों को अच्छी तह से जोड़ने में सक्षम बनाया जाएगा। पाठ्यक्रम के अनुसार, कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्रों के लिए कुल पांच पुस्तकें तैयार की जाएंगी। राज्य में 32 शिक्षकों की एक कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसके तहत पाठ्यक्रम के विषयों पर अहम फैसला लिया जाएगा। अप्रैल 2022 शैक्षणिक सत्र से अनुभूति पाठ्यचर्या को शुरू करने की योजना है।
योजना पर राज्य के स्कूल कर रहे काम
उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 150 स्कूल इस पहल की दिशा में काम कर रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों के साथ बैठकें भी की जा रही हैं, जिसमें पाठ्यचर्या को लेकर विभिन्न आयामों पर चर्चाएं हो रही हैं। एक अधिकारी के अनुसार राज्य में एक लाख 30 हजार प्राथमिक स्कूल हैं और सभी स्कूलों में अनुभूति पाठ्यचर्या को लागू करने के लिए राज्य सरकार द्वारा मूल्यांकन किया जा रहा है।