उच्चतर माध्यमिक परीक्षा के आधार पर होना चाहिए प्रवेश
समिति ने कहा कि नीट को खत्म करने से सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा और सभी कमजोर छात्र समुदायों को चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रमों में प्रवेश में हो रहे भेदभाव से बचाया जा सकेगा। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त अंक प्रथम डिग्री चिकित्सा कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए एकमात्र मानदंड होना चाहिए। विभिन्न शिक्षा बोर्ड के छात्रों को समान अवसर देने के लिए, अंकों के सामान्यीकरण (नॉर्मलाइजेशन) का पालन किया जा सकता है।
70 फीसदी छात्र अब प्राइवेट अस्पतालों में करना चाहते हैं काम
जस्टिस एके राजन समिति के सदस्य डॉ जवाहर नेसन ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि नीट के आधार पर दाखिला लेने वाले मुख्य रूप से शहरी, संपन्न, शिक्षित परिवारों से हैं। हमने पाया कि 70 फीसदी छात्रों ने अपना पीजी कोर्स पूरा करने के बाद निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों के साथ काम करना चुना। लेकिन नीट की शुरुआत से पहले ऐसा नहीं था। इससे पहले, 70 फीसदी छात्रों ने सरकारी अस्पतालों में काम करना चुना था। इसलिए मैं कहूंगा कि नीट विनाशकारी है, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को चकनाचूर कर देगी।