दरअसल, ढाई दर्जन डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा 16 जून को आयोजित होने वाली आईएनआई सीईटी परीक्षा, 2021 को स्थगित करने की गुहार लगाई थी। यह परीक्षा चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है।
पीएमओ से मिले आश्वासन की अवहेलना
दो अलग-अलग याचिकाओं में कहा गया था कि 16 जून को परीक्षा आयोजित करना, प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा नीट (पीजी) परीक्षा, 2021 को चार महीने के लिए स्थगित करने का निर्णय लेते वक्त पीजी परीक्षाओं को स्थगित करने के संबंध में दिए गए आश्वासन की घोर अवहेलना है। पीएमओ की ओर से यह भी कहा गया कि उक्त परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों को कम से कम एक महीने का समय दिया जाएगा।
अदालत में ये दलीलें बनीं आधार
याचिका में कहा गया था कि इस मामले में केवल 19 दिन की पूर्व सूचना दी गई है। याचिकाकर्ता डॉक्टरों का कहना था कि कोरोना काल में वे फ्रंट लाइन वर्कर्स की तरह काम कर रहे हैं। ऐसे में 19 दिनों की पूर्व नोटिस पर परीक्षा आयोजित करना उचित नहीं है। इसके अलावा उनका यह भी कहना था कि परीक्षा केंद्र अलग-अलग राज्यों में हैं या उम्मीदवारों के काम करने की जगह से दूर हैं। कोविड-19 को लेकर पाबंदियों की वजह से परीक्षा के लिए बाहर जाने में परेशानी आ सकती है।