सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और तमिलनाडु सरकार से राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में 50 फीसदी सीटें प्रदेश में सेवारत डॉक्टरों के लिए आरक्षित की गई हैं। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, तमिलनाडु सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस नीट-एसएस-2021 परीक्षा में शामिल कुछ लोगों की याचिका पर जारी किया गया।
मामले पर याचिका रश्मि नंदकुमार की ओर से दायर की गई है। वहीं कोर्ट के समक्ष इस मामले पर आज वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन, अधिवक्ता शंकर नारायणन और सुहृत पार्थसारथी द्वारा पैरवी की गई। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई को 25 फरवरी, 2022 तक के लिए टाल दिया है।
इस मामले में याचिकाकर्ता एन कार्तिकेयन और अन्य छात्र नीट एसएस 2021 में शामिल हुए थे। यह परीक्षा 10 जनवरी, 2022 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के परिणाम इस महीने के अंत में जारी किए जा सकते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 7 नवंबर, 2020 को तमिलनाडु सरकार का आरक्षण का फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 का स्पष्ट उल्लंघन है।