संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा ने सोमवार, 09 अगस्त, 2021 को केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021 पारित किया, जो केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए सदन में लाया गया था। राज्यसभा ने कांग्रेस, टीएमसी और द्रमुक सहित विपक्षी दलों के बहिर्गमन के बीच ध्वनि मत से विधेयक पारित कर दिया। इससे पहले, शनिवार, 07 अगस्त, 2021 को ही लोकसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी।
राज्यसभा में सोमवार को विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि लेह, लद्दाख, प्रधानमंत्री के लिए एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। इस क्षेत्र में हम एक गुणवत्ता संस्थान स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, वर्तमान में लद्दाख में कोई केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं है और इसलिए, सरकार ने उच्च शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए वहां एक नया विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय किया है।
इसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश के लोगों के लिए उच्च शिक्षा और अनुसंधान के अवसरों को सुगम बनाना और बढ़ावा देना है। यह आने वाले वर्षों के लिए क्षेत्रीय आकांक्षाओं को भी पूरा करेगा। उद्देश्यों के बयान के अनुसार, विधेयक लद्दाख में "सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय" नामक एक विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रदान करने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 में संशोधन करना चाहता है।
विश्वविद्यालय लद्दाख के सभी क्षेत्रों को कवर करेगा जिसमें लेह और कारगिल शामिल हैं। सरकार ने कहा था कि विश्वविद्यालय से शिक्षा क्षेत्र में इस क्षेत्र में असंतुलन को कम करने और लद्दाख के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अवसर प्राप्त करने में मदद करने की उम्मीद है।
बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में 750 करोड़ रुपये की लागत से एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय किया था। इसके लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 में बदलाव के लिए संशोधन विधेयक 2021 को लोकसभा में गुरुवार, पांच अगस्त को पेश किया था। हालांकि, सदन में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया था।