केस नंबर दो
कक्षा 11 की एक छात्रा पढ़ने में बहुत होशियार थी, लेकिन वर्ष 2021 में पिता का कोविड से निधन होने से उसकी पूरी दुनिया बदल गई। काउंसलिंग में उसने बताया कि मां की एक करीबी रिश्तेदार से नजदीकी देखकर वह पढ़ाई से दूर हो गई है। कहा-जब भी पढ़ने बैठती हूं तो मां के बारे में सोचने लगती हूं। भविष्य में अकेले हो जाने का डर लगता है। किसी पर भरोसा करने का मन नहीं करता।
काउंसलिंग में जब मां को बुलाया तो पहली बार में उन्होंने हर आरोप से इनकार किया। अकेले में कड़ाई से पूछा तो कुछ बातें स्वीकार की । कुछ देर की बातचीत में काउंसलर से कहा-सहयोग कीजिए, मैं बेटी पर ध्यान दूंगी। मनोवैज्ञानिक ने छात्रा को समझाया कि तुमको गलतफहमी हो सकती है। हो सकता है कि पापा के न रहने से परिवार का ख्याल रखने की नीयत से रिश्तेदार घर से जुड़ा हो। मां ने तुम्हारी नजदीकी के लिए रिश्तेदार को घर से दूर रखने का निर्णय लिया है।
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केस नंबर तीन
कक्षा 12 की एक छात्रा कक्षा आठ तक विदेश में पढ़ी है। उसके छह वर्ष के भाई को कैंसर है। माता-पिता बेटे की चिंता में लगे रहते हैं। काउंसलिंग में उसने बताया कि भाई के लिए मैं भी परेशान होती हूं, लेकिन मां-बाप का प्यार नहीं मिलने की वजह से बेचैनी होती है। पढ़ाई करती हूं तो रोने का मन करता है। भूख नहीं लगती है। किसी से बात करने का मन नहीं करता है। काउंसिलिंग में उसे समझाया गया कि यह स्वाभाविक है। आत्मनिर्भर बनने के भाव के साथ पढ़ाई करो। माता-पिता के लिए बेटे जैसी भूमिका निभाने की तैयारी करो। ऐसा पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने से ही संभव है।
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