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Board Exam Tips 2023: अभिभावक आपसी खींचतान भूलकर परीक्षा तक बच्चे पर दें ध्यान, एक्सपर्ट ने दिए ये मंत्र

Sun, 15 Jan 2023 12:13 PM IST
सौरभ पांडेय अमर उजाला ब्यूरो

सार

UP Board exam 2023: मुरादाबाद मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में विद्यार्थियों के बीच से चौंकाने वाली समस्याएं सामने आ रही हैं। जिन्हें गंभीरता से लेते हुए एक्सपर्ट्स ने परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है।  
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UP board exa 2023 exam stress tips - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मुरादाबाद। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में विद्यार्थियों के बीच से चौंकाने वाली समस्याएं सामने आ रही हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे कई विद्यार्थियों ने अभिभावकों के रवैये या घर के माहौल को पढ़ाई से दूरी का कारण बताया है तो कुछ ने स्कूल या साथियों की शिकायत रखी। काउंसिलिंग में बच्चों को फिलहाल सिर्फ परीक्षा और पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है। अभिभावकों को समझाया गया है कि वे आपसी खींचतान और गिले-शिकवे भूलकर परीक्षाएं पूरी होने तक बच्चे को अनुकूल माहौल दें।
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केस नंबर एक

कटघर निवासी कक्षा दस के छात्र ने मनोविज्ञान केंद्र पर 18 समस्याओं का पर्चा थमा दिया। खुद के मोटापे पर चिंता जताई तो स्कूल में साथियों द्वारा छेड़े जाने की शिकायत रखी। लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे...जैसे सवाल का डर मन में बताया। सवाल उठाए कि मैं क्यों पढ़ूं, खुद को मैं पढ़ाई योग्य नहीं मानता। स्कूल और खाने में मन नहीं लगता। मोबाइल फोन देखना ही अच्छा लगता है। काउंसलिंग में अभिभावकों से पूछा गया तो उन्होंने बेटे की कमियां गिना डालीं। कहा कि वह अपनी बहन से ईर्ष्या रखता है, हर वक्त मोबाइल देखता है या शीशे (आइना) के आगे खड़ा हो जाता है। अभिभावकों को बेटे के प्रति सकारात्मक सोच बनाने और बेटी से तुलना न करने की सलाह दी गई। छात्र को समझाया गया कि खुद को सबसे अच्छा मानो। अपने अच्छे काम और फैसले तलाश तक खुद पर गर्व करो। किताबों को दोस्त मानकर पढ़ाई में जुटो।

केस नंबर दो

कक्षा 11 की एक छात्रा पढ़ने में बहुत होशियार थी, लेकिन वर्ष 2021 में पिता का कोविड से निधन होने से उसकी पूरी दुनिया बदल गई। काउंसलिंग में उसने बताया कि मां की एक करीबी रिश्तेदार से नजदीकी देखकर वह पढ़ाई से दूर हो गई है। कहा-जब भी पढ़ने बैठती हूं तो मां के बारे में सोचने लगती हूं। भविष्य में अकेले हो जाने का डर लगता है। किसी पर भरोसा करने का मन नहीं करता। 
काउंसलिंग में जब मां को बुलाया तो पहली बार में उन्होंने हर आरोप से इनकार किया। अकेले में कड़ाई से पूछा तो कुछ बातें स्वीकार की । कुछ देर की बातचीत में काउंसलर से कहा-सहयोग कीजिए, मैं बेटी पर ध्यान दूंगी। मनोवैज्ञानिक ने छात्रा को समझाया कि तुमको गलतफहमी हो सकती है। हो सकता है कि पापा के न रहने से परिवार का ख्याल रखने की नीयत से रिश्तेदार घर से जुड़ा हो। मां ने तुम्हारी नजदीकी के लिए रिश्तेदार को घर से दूर रखने का निर्णय लिया है।
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केस नंबर तीन

कक्षा 12 की एक छात्रा कक्षा आठ तक विदेश में पढ़ी है। उसके छह वर्ष के भाई को कैंसर है। माता-पिता बेटे की चिंता में लगे रहते हैं। काउंसलिंग में उसने बताया कि भाई के लिए मैं भी परेशान होती हूं, लेकिन मां-बाप का प्यार नहीं मिलने की वजह से बेचैनी होती है। पढ़ाई करती हूं तो रोने का मन करता है। भूख नहीं लगती है। किसी से बात करने का मन नहीं करता है। काउंसिलिंग में उसे समझाया गया कि यह स्वाभाविक है। आत्मनिर्भर बनने के भाव के साथ पढ़ाई करो। माता-पिता के लिए बेटे जैसी भूमिका निभाने की तैयारी करो। ऐसा पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने से ही संभव है।

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एक्सपर्ट के सुझाव

  • अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
  • बच्चों के सामने लड़ाई-झगड़ा न करें।
  • प्रतिदिन बच्चों के स्कूल की गतिविधियों के बारे में जानें।
  • बच्चों के सामने फोन का कम से कम इस्तेमाल करें।
  • पूरा परिवार एक वक्त का खाना साथ खाएं।
  • पढ़ाई के समय घर में शांत माहौल रखें।
  • सुबह बच्चे के साथ जागें और पढ़ाई के समय उसके आसपास रहें, ताकि उसे अकेलापन महसूस न हो।
  • बच्चे के व्यवहार पर नजर रखें, बदलाव दिखते ही काउंसलर को दिखाएं।
  • बच्चों से उम्मीद लगाने से पहले खुद को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करें।

घर की विपरीत परिस्थिति जब बदलाव के लायक नहीं होती तो विद्यार्थियों को समझाया जाता है कि तुम्हारे लिए तुम्हारा जीवन कितना जरूरी है, करियर कितना जरूरी है। अपनी प्राथमिकताओं को तलाशो और उस पर काम करो। किशोर उम्र में यदि पारिवारिक वातावरण खराब मिलता है तो ऐसों को उबारने के लिए मनोवैज्ञानिक सलाह कारगर होती है। - डॉ. मीनू मेहरोत्रा, मनोविश्लेषक

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स्कूल में जब विद्यार्थी साथ रहते हैं तो घर के खराब अनुभव को भूल जाते हैं। घर पर रहने या अकेले ऑनलाइन रहने के दौरान बच्चों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में अभिभावकों का दायित्व है कि वह बच्चों को उनके साथ होने का अहसास कराएं। उन पर भरोसा करें। यदि स्थिति ज्यादा खराब है तो काउंसलिंग करवाएं। - रीना तोमर, मंडलीय मनोविज्ञान अधिकारी
 
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