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कोरोना का कहर : महामारी के कारण 19 माह बाद भी दुनियाभर के आधे स्कूलों में ही शुरू हो पाई पढ़ाई, पढ़ें रिपोर्ट

Mon, 11 Oct 2021 01:03 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

कोविड-19 ग्लोबल एजुकेशन रिकवरी ट्रैकर की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर केवल आधे स्कूलों ने कक्षाओं में पढ़ाई फिर से शुरू की है, जबकि लगभग 34 प्रतिशत स्कूल मिश्रित शिक्षण माध्यम यानी कक्षा में बुलाकर और ऑनलाइन दोनों ही तरीकों से पढ़ाई पर निर्भर हैं। 
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स्कूल री-ओपनिंग - फोटो : ANI
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विस्तार
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वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में 19 महीने से भीअधिक वक्त से स्कूल बंद हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई और लर्निंग प्रोसेस बेहद प्रभावित हुई है। हालांकि, कई देशों में बड़े स्तर टीकाकरण शुरू होने और कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों में कमी आने के बाद दुनियाभर के आधे स्कूल फिर से खुल चुके हैं। कोविड-19 ग्लोबल एजुकेशन रिकवरी ट्रैकर की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर केवल आधे स्कूलों ने कक्षाओं में पढ़ाई फिर से शुरू की है, जबकि लगभग 34 प्रतिशत स्कूल मिश्रित शिक्षण माध्यम यानी कक्षा में बुलाकर और ऑनलाइन दोनों ही तरीकों से पढ़ाई पर निर्भर हैं।  

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जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, वर्ल्ड बैंक और यूनिसेफ द्वारा 200 से अधिक देशों में स्कूलों को फिर से खोलने और कोविड-19 के बाद लोगों के स्वास्थ्य लाभ की योजना बनाने के प्रयासों पर नजर रखकर देशों के निर्णय लेने में सहायता के लिए संयुक्त रूप से कोविड-19 ग्लोबल एजुकेशन रिकवरी ट्रैकर को तैयार किया गया है। रिपोर्ट में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 80 फीसदी स्कूल नियमित सत्रों का संचालन कर रहे हैं। उनमें से, 54 फीसदी व्यक्तिगत रूप से शिक्षण की तरफ लौट गए हैं, 34 प्रतिशत मिश्रित शिक्षण पर निर्भर हैं, जबकि 10 प्रतिशत दूरस्थ शिक्षा दे रहे हैं और दो प्रतिशत में किसी तरह से पढ़ाई नहीं हो रही है।

ट्रैकर ने उल्लेख किया कि केवल 53 प्रतिशत देश कोरोना वैक्सीन लगवा चुके शिक्षकों को प्राथमिकता दे रहे हैं वहीं, वर्ल्ड बैंक ने सिफारिश की है कि देशों को स्कूलों को फिर से खोलने से पहले अपनी जनसंख्या या स्कूल के कर्मचारियों को पूरी तरह से वैक्सीन लगाने तक के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। वर्ल्ड बैंक की एजुकेशन टीम ने एक रिपोर्ट में कहा कि शिक्षा की बहाली को बढ़ावा देने के लिए, जहां संभव हो, वैक्सीनेशन के लिए शिक्षकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए लेकिन यह भी मानना चाहिए कि पर्याप्त सुरक्षा कदमों के जरिए वैक्सीनेशन के बिना भी सुरक्षित रूप से स्कूलों को फिर से खोलने के तरीके उपलब्ध हैं।
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रिपोर्ट में कहा गया कि यह देखते हुए कि दुनिया भर में फिर से खुले स्कूलों ने आसान एवं कम खर्चीली संक्रमण नियंत्रण रणनीतियां जैसे मास्क, वेंटिलेशन और शारीरिक दूरी के साथ स्कूलों में कोरोना संक्रमण को प्रभावी ढंग से रोका है और यह ध्यान में रखते हुए कि ज्यादातर देशों में व्यापक टीकाकरण आने वाले कई महीनों में संभावित नहीं है और इस कारण स्कूलों को तब तक बंद रखना जब तक कि सभी कर्मचारियों को टीका न लग जाए, यह संक्रमण को कम करने के लिहाज से कोई फायदा नहीं देगा, लेकिन बच्चों के लिए यह संभवत: महंगा साबित हो सकता है। इसलिए, वर्ल्ड बैंक स्कूलों को फिर से खोलने और दुनिया भर में स्कूलों के लंबे समय तक बंद रहने से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन करने की वकालत करता रहा है। 

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