शीर्ष अदालत ने गुरुवार, 21 अगस्त, 2021 को आदेश पारित करते हुए कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार से विशिष्ट प्रतिक्रिया मांगी है-
- क्या केंद्र ने ईडब्ल्यूएस निर्धारित करने के लिए मानदंड पर पहुंचने से पहले कोई अभ्यास किया था?
- यदि उत्तर 'हां' में है तो क्या सिंह आयोग की रिपोर्ट पर आधारित मानदंड है? यदि ऐसा है तो रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाया जाए।
- ओबीसी में क्रीमी लेयर और ईडब्ल्यूएस के लिए आय सीमा समान है (आठ लाख रुपये की वार्षिक आय)। ओबीसी श्रेणी में आर्थिक रूप से उन्नत श्रेणी को बाहर रखा गया है। ऐसे में क्या ईडब्ल्यूएस और ओबीसी के लिए समान आय सीमा प्रदान करने को मनमानी नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि ईडब्ल्यूएस में सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की कोई अवधारणा नहीं है।
- क्या इस सीमा को तय करते समय ग्रामीण और शहरी क्रय शक्ति में अंतर को ध्यान में रखा गया था?
- किस आधार पर परिसंपत्ति अपवाद के नतीजे पर पहुंचा गया और उसके लिए कोई अभ्यास किया गया था?
- आखिर क्यों नहीं आवासीय फ्लैट मानदंड, महानगरीय और गैर-महानगरीय क्षेत्र में अंतर नहीं करता है?
निर्णायक कारकों को जानने की जरूरत है : अदालत
पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है, 'हम स्पष्ट करते हैं कि हम नीति के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर रहे हैं लेकिन संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करने के लिए हमें इस मानदंड तक पहुंचने वाले कारकों को जानने की जरूरत है।' पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अनुच्छेद-15 (6) और 16 (6) के स्पष्टीकरण के अनुसार राज्य सरकारें ईडब्ल्यूएस के लिए मानदंड अधिसूचित करती हैं। 103वें संविधान संशोधन में शामिल स्पष्टीकरण में कहा गया है कि अनुच्छेद 15 और 16 के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ऐसे होंगे, जो राज्य द्वारा समय-समय पर पारिवारिक आय और आर्थिक अपर्याप्तता के अन्य संकेतकों के आधार पर अधिसूचित किए जाएं। शीर्ष अदालत ने केंद्र से देश भर में एक समान आधार पर ईडब्ल्यूएस मानदंड को अधिसूचित करने का आधार भी पूछा है।