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समानता को बढ़ावा: इस स्कूल में लड़के व लड़कियों के लिए है समान यूनिफॉर्म, गांव ने दिया तीन-चौथाई क्रांति का नाम

Sat, 20 Nov 2021 01:20 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

एर्नाकुलम जिले के वलयनचिरंगारा में एक सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल ने अपने सभी छात्रों को एक समान वर्दी की शुरुआत करके लैंगिक तटस्थता का उदाहरण पेश किया है।
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केरल का वही स्कूल - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल के एर्नाकुलम जिले के वलयनचिरंगारा सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल ने लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए लिंग-तटस्थ वर्दी (जेंडर-न्यूट्रल यूनिफॉर्म) को अपनाकर एक नया ट्रेंड स्थापित किया है। सभी छात्र अब शर्ट और तीन-चौथाई पहनते हैं, जिससे लड़कियों को बिना किसी हिचकिचाहट के आवाजाही करने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है। निर्णय को कुछ ग्रामीणों, शिक्षकों और छात्रों के माता-पिता के नेतृत्व में एक शांत क्रांति के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है - वे इसे 'तीन-चौथी क्रांति' कहते हैं।

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चार साल पहले की गई थी शुरुआत
स्कूल में दो विंग हैं- प्री-प्राइमरी और लोअर प्राइमरी- कुल 746 छात्रों के साथ। जेंडर न्यूट्रल यूनिफॉर्म पहली बार 2017 में प्री-प्राइमरी छात्रों के लिए शुरू किया गया था। अब इसे कक्षा पहली से चौथी तक बढ़ा दिया गया है।

कैसे हुई इसकी शुरुआत?
इस वर्दी को पेश करने वाले पूर्व प्रधानाध्यापिका सी राजी कहते हैं कि यह एक अच्छी दृष्टि वाला स्कूल है। जब हम स्कूल में लागू करने के लिए कई कारकों के बारे में बात कर रहे थे तो लैंगिक समानता मुख्य विषय था। इसलिए वर्दी के बारे में दिमाग में आया। जब मैं सोच रहा था कि इसके साथ क्या करना है, तो मैं देख सकता था कि जब स्कर्ट की बात आती है तो लड़कियों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बदलाव के विचार पर सभी के साथ चर्चा की गई थी। उस समय 90 फीसदी माता-पिता ने इसका समर्थन किया था। बच्चे भी खुश थे। मुझे बहुत खुशी और गर्व महसूस होता है कि अब इस पर चर्चा हो रही है।

लड़कियों को होती थी ये समस्याएं
एनपी अजयकुमार पूर्व स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने कहते हैं कि छात्रों और अभिभावकों के मन में लैंगिक समानता होनी चाहिए। स्कर्ट पहनने पर लड़कियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शौचालय जाने और खेलते समय समस्याएं होती हैं। वह भी एक कारक है। यह पोशाक लिंग-तटस्थ वर्दी की अवधारणा से ली गई है। यह 105 साल पुराना स्कूल है। इसलिए, किसी का कोई महत्वपूर्ण विरोध नहीं था। अकादमिक समिति के निर्णय को सभी ने स्वीकार कर लिया। इसे हमारी अपेक्षा से अधिक मान्यता मिली।
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क्या था इस फैसले के पीछे का कारण?
वर्तमान हेडमिस्ट्रेस प्रभारी सुमा केपी बताते हैं कि हालांकि यह निर्णय 2018 में लागू किया गया था। इस वर्दी ने बच्चों को बहुत आश्वस्त किया। यह वर्दी कुछ भी करने में बहुत मददगार है, खासकर लड़कियों के लिए। वे और उनके माता-पिता इस फैसले से बहुत खुश हैं। इस निर्णय के पीछे यह विचार है कि लड़कों और लड़कियों को समान स्वतंत्रता और खुशी मिलनी चाहिए।
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