Jadavpur University Update: हाल ही में पश्चिम बंगाल स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय में कथित तौर पर रैगिंग और यौन उत्पीड़न के चलते एक छात्र की मौत हो गई थी। इस मामले पर जादवपुर विश्वविद्यालय ने यूजीसी को एक रिपोर्ट दी थी, जिसपर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय द्वारा यूजीसी को दी गई रिपोर्ट "संतोषजनक नहीं" थी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार इस घटना के लिए "जिम्मेदारी से बच नहीं सकती"। मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने रैगिंग रोधी प्रणाली पर कुछ सुझाव दिए हैं, जिसमें सीसीटीवी कैमरे लगाना, रैगिंग के मामलों से निपटने के लिए एक अलग सेल और संचार सुविधा समेत अन्य सुझाव शामिल हैं।
प्रधान ने एक कार्यक्रम से कहा, "विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने जादवपुर यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है कि उसने इन सुझावों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। यूजीसी ने मामले को गंभीरता से लिया है, और हमने भी इसे गंभीरता से लिया है। आयोग को सौंपी गई विश्वविद्यालय की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं थी।" उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में रैगिंग के लिए कोई जगह नहीं है।
जेयू के एक अधिकारी ने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने "within the regulatory framework about what had been done and the reasons for what could not be done" सवालों का जवाब दिया है। आसान भाषा में समझें तो विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने क्या किया गया था और जो नही किया जा सका उसके कारणों का स्पष्टीकरण दिया है।
विश्वविद्यालय ने वैधानिक निकाय के निर्देशानुसार, स्नातक छात्र की कथित रैगिंग और यौन उत्पीड़न के कारण उसकी मृत्यु के बारे में कई प्रश्नों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को एक विस्तृत रिपोर्ट भी भेजी। 17 वर्षीय छात्र की 9 अगस्त को लड़कों के मुख्य छात्रावास की दूसरी मंजिल की बालकनी से गिरने के बाद मौत हो गई। उसके परिवार ने आरोप लगाया कि वह रैगिंग का शिकार था।