सीबीएसई ने अपने आधिकारिक सर्कुलर में कहा कि कक्षा 11 और 12 के अंकों को मॉडरेट करना एक "बड़ी जिम्मेदारी" होगी। स्कूलों की नीति में किसी भी तरह के अंतर की वजह से कुछ छात्रों लाभ या नुक्सान हो सकता है। इसलिए स्कूलों को अनिवार्य रूप से निष्पक्ष तरीके से अंक देने के लिए कहा गया है। ताकि किसी भी छात्र को किसी भी तरह का नुकसान या फायदा न हो।
इस वर्ष स्कूलों को अंकों की गणना करनी है। लेकिन देश के सभी स्कूलों में समानता की कमी होनी की वजह सीबीएसई की मूल्यांकन नीति पर कई लोगों ने चिंता जताई है। दरसअल, देश के विभिन्न विद्यालयों द्वारा आयोजित परीक्षाओं के लिए तैयार किए गए प्रश्न पत्रों के कठिनाई स्तर, मोड और अन्य मापदंडों में काफी अंतर होता है। जिसकी वजह से परिणामों में अंतर आने की बहुत ज्यादा संभावना है। बता दें कि कक्षा बारहवीं का परिणाम तैयार करने के लिए कक्षा 11वीं और 12वीं के 70 फीसदी अंक लिए जा रहे हैं। जिसकी गणना स्कूलों द्वारा की जानी है।
हालांकि परिणाम की सही रूप से गणना हो यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक स्कूल में एक समिति का गठन किया गया है। वहीं निष्पक्ष और पारदर्शी परिणाम मॉडरेशन सुनिश्चित करने के लिए कक्षा 11वीं और कक्षा 12वीं के अंकों को अन्य छात्रों के स्तर तक बढ़ाने के लिए स्केलिंग करना पड़ सकता है।