पहली योजना- पहली नौकरी वालों को एक माह का वेतन
सरकार कर्मचारी भविष्य निधि- ईपीएफओ में पंजीकृत हुए पहली बार रोजगार पाने वाले लोगों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से एक महीने का वेतन 15 हजार की तीन किस्तों में देगी और यह अधिकतम होगा। इस योजना से दो वर्ष तक 2.1 करोड़ युवा लाभांवित होंगे।
यह योजना सभी प्रमुख औपचारिक कार्य क्षेत्रों में कामगार के रूप में शामिल होने वाले नए युवाओं पर लागू होगी। इस योजना में शामिल होने के लिए पात्रता सीमा एक लाख रुपये प्रति माह वेतन होगी। रोजगार नियुक्ति होने से 12 महीने की अवधि में समाप्त हो जाता है, तो सब्सिडी की राशि नियोक्ता को लौटानी होगी।
दूसरी योजना- विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन
विनिर्माण के क्षेत्र में रोजगार देने और पाने वालों को सरकार इंसेंटिव देगी। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को उनके ईपीएफओ में योगदान के अनुसार, रोजगार के पहले 4 साल में इंसेंटिव दिया जाएगा। यह एक लाख रुपये तक प्रतिमाह वेतन पाने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा। इस योजना से हर साल कार्यशक्ति में प्रवेश करने वाले 30 लाख युवाओं को लाभ मिलेगा।
तीसरी योजना- नियोक्ताओं को सहायता
इसके तहत नियोक्ताओं को प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के लिए दो वर्ष तक उनके प्रतिमाह तीन हजार रुपये तक के ईपीएफओ योगदान की प्रतिपूर्ति की जाएगी। नियोक्ताओं को कम से कम ऐसे कामगारों को नियुक्त करना होगा, जिनका पहले से ईपीएफओ का नामांकन न हुआ हो।
साथ ही कंपनी पिछले वर्ष में ईपीएफओ की तुलना में कम से कम दो या पांच कर्मचारी बढ़ाती है, तो उन कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। योजना से 50 लाख लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिलने की उम्मीद है।
कौशल और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का होगा उन्नयन
अगले पांच वर्षों में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा। इसके परिणाम और गुणवत्ता पर जोर दिया जाएगा। इसमें राज्यों और उद्योग के सहयोग से केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना भी शामिल है। इसका सबसे ज्यादा लाभ उत्तर प्रदेश को होने वाला है, क्योंकि यूपी में 71 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं।
बुनियादी शोध के लिए कोष बनेगा
बुनियादी शोध और प्रोटोटाइप विकास के लिए अनुसंधान नेशनल रिसर्च फंड को संचालित किया जाएगा। वाणिज्यिक पैमाने पर निजी क्षेत्र की तरफ से चलाए जाने वाले अनुसंधान और नवाचार के लिए एक तंत्र तैयार किया जाएगा। इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये का कोष तैयार किया जाएगा जिसकी घोषणा अंतरिम बजट में की गई थी।