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मातृभाषा में पढ़ाई तो होगी पर अंग्रेजी की नहीं होगी उपेक्षा, एआईसीटीई चेयरमैन बोले-गुणवत्ता से समझौता नहीं

Sun, 08 Aug 2021 08:02 AM IST
Kuldeep Singh सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पहली बार इंजीनियरिंग की पढ़ाई में अंग्रेजी भाषा में कमी छात्रों के लिए बाधा नहीं बनेगी। छात्र अपनी सुविधा में भारतीय भाषाओं का विकल्प चुन सकेंगे। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते नई शिक्षा नीति के तहत 14 इंजीनियरिंग कॉलेजों में पांच भारतीय भाषाओं में बीटेक प्रोग्राम की पढ़ाई की घोषणा की है। इसी के तहत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) सितंबर से शुरू होने वाले आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए बीटेक पहले वर्ष की किताबों को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध करवाने की अंतिम तैयारियों में जुटा है।

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अंग्रेजी भाषा की एक विषय के रूप में पढ़ाई अनिवार्य
पहली बार इंजीनियरिंग की पढ़ाई में अंग्रेजी भाषा में कमी छात्रों के लिए बाधा नहीं बनेगी। छात्र अपनी सुविधा में भारतीय भाषाओं का विकल्प चुन सकेंगे। हालांकि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उन्हें बीटेक की चार साल की पढ़ाई के दौरान अंग्रेजी भाषा एक विषय के रूप में पढऩी होगी।

नौकरी के लिए कम्यूनिकेशन स्किल की ट्रेनिंग
स्कूली शिक्षा क्षेत्रीय भाषाओं से पढ़कर आने वाले छात्रों की अंग्रेजी भाषा और कम्युनिकेशन स्किल को भी तराशा जाएगा। मातृभाषा में पढ़ाई को लेकर एआईसीटीई  चेयरमैन प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे से विशेष बातचीत।
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इंजीनियरिंग की किताबें क्षेत्रीय भाषाओं में ट्रांसलेट होने से साइंटीफिक टर्म में क्या अंतर आएगा?
जवाब-
 इंजीनियरिंग की किताबें अभी तक अंग्रेजी भाषा में होती थी, लेकिन अब हिंदी समेत क्षेत्रीय भाषओं में ट्रांसलेट की जा रही हैं। इसमें विषय और भाषा के विशेषज्ञों की टीम मिलकर भाषा को ट्रांसलेट कर रहे हैं, लेकिन इसके चलते फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ्स के साइंटिफिक टर्म में कोई अंतर नहीं आएगी। ऐसे साइंटीफिक टर्म के बारे में छात्रों को समझाने के लिए संबंधित भाषा का प्रयोग किया जाएगा।

प्रश्न- किताबें कब तक छपकर मार्केट में उपलब्ध होंगी?
जवाब-
 शैक्षणिक सत्र 2021के तहत  सितंबर से कक्षाएं शुरू होनी है। इससे पहले मार्केट में किताब उपलब्ध होंगी। ट्रांसलेट का काम लगभग पूरा हो गया है। इसमें करीब 800 लेखक काम कर रहे हैं। गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। फिलहाल 14 कॉलेजों से हिंदी समेत 5 क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर रहे हैं, लेकिन 2022 तक 22 भाषाओं के छात्रों को पढ़ाई का मौका देने की योजना है।

यदि किसी छात्र को क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई पसंद नहीं आती है तो क्या विकल्प होगा?
जवाबऱ् हिंदी समेत क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई का मतलब छात्रों को पढ़ाई में भाषा की बाध्यता से आजादी दिलाना है। यदि कोई छात्र पहले वर्ष हिंदी या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करने के बाद अंग्रेजी भाषा का विकल्प चुनना चाहता होगा उसे मौका मिलेगा। यानी दूसरे, तीसरे वर्ष में वह भाषा का विकल्प बदल सकता है। ऐसे ही यदि कोई अंग्रेजी भाषी छात्र क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करना चाहता होगा तो भी उसे भी मौका मिलेगा।

इन 14 कॉलेजों में 1050 सीटों पर मातृभाषा की पढ़ाई

  • पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जयपुर ( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) हिंदी
  • एनआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी आंध्र प्रदेश ( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) तेलगू
  • जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट,  ग्रेटर नोएडा ( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इंफोरमेंशन टेक्नोलॉजी ) हिंदी
  • परनवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर ( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) हिंदी
  • अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज, गाजियाबाद( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) हिंदी
  • नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ग्रेटर नोएडा( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) हिंदी
  • ग्राफिक इरा डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी, देहरादून ( कंप्यूटर साइंस,इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन, मैकेकिनल इंजीनियरिंग ) हिंदी
  • पीसी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, महाराष्ट्र ( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) मराठी
  • इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंस आईपीएस अकेडमी,  मध्यप्रदेश ( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) हिंदी
  • टेक्नीक पॉलिटिक्स  इंस्टीट्यूट , पश्चिम बंगाल (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ) बंगाली
  • ईएस इंजीनियरिंग कॉलेज, तमिलनाडु( सिविल, इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रानिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग) तमिल
  • आरटी कैंपस,  तमिलनाडु ( कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ) तमिल
  • कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, महाराष्ट्र( इलेक्ट्रिकल व सिविल इंजीनियरिंग ) मराठी
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