जेएनयू में अफगान छात्रों ने एएनआई से बातचीत के दौरान कहा कि अफगानिस्तान जैसे युद्धग्रस्त देश में अधिकांश लोग बड़े पैमाने पर बेरोजगार हैं और मौत या कैद से बचने की कोशिश कर रहे हैं। भारी शुल्क की व्यवस्था करना असंभव लगता है। वहीं टर्मिनल के छात्रों को 23 सितंबर तक छात्रावास छोड़ना पड़ता है, जिसकी वजह से अब उन्हें।
जेएनयू के एक छात्र जलालुद्दीन ने बताया कि अफगानिस्तान की स्थिति बेहद गंभीर है। मुझे उम्मीद है कि प्रशासन हमारी स्थिति को समझेगा और मेरा वीजा परमिट बढ़ा देगा। साथ ही, जेएनयू में पीएचडी विदेशी नागरिकों के लिए और गरीब परिवारों के लिए बहुत महंगा है। हालांकि, वर्तमान में, मैं वास्तव में नहीं जानता कि क्या करना है।
जेएनयू में इंटरनेशनल रिलेशंस एंड एरिया स्टडीज के छात्र शफीक सुल्तान ने बताया कि मेरा वीजा 31 दिसंबर तक खत्म हो जाएगा। मैं यहां पढ़ने के लिए आने से पहले एक सरकारी कर्मचारी था। मुझे यकीन है कि अगर मैं वापस जाऊंगा तो वे मुझे पकड़ लेंगे। मेरा परिवार तालिबान के कब्जे वाले इलाके में रह रहा है और मैं पिछले डेढ़ हफ्ते से उनसे संपर्क नहीं कर पा रहा हूं। तनाव बढ़ रहा है, हमें निश्चित रूप से मदद की जरूरत है।