अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हो विश्वविद्यालय
डीयू का विजन है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात विश्वविद्यालय बनना जो शिक्षण, अनुसंधान और आउटरीच में उत्कृष्टता के लिए पहचाना जाता हो। कुलपति ने बताया कि विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका तय करनी है। इसके लिए देश को कैसे वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, इतिहासकार और नागरिक चाहिए होंगे और उसमें डीयू की क्या भूमिका हो सकती है। इन सबको ध्यान में रखते हुए प्लान तैयार किया गया है।
परिषद के सदस्यों के सुझावों पर गंभीरता से विचार के बाद प्लान के मसौदे को तैयार किया। साथ ही बैठक में इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट प्लान पर निर्णय के लिए कुलपति को अधिकृत कर दिया। आईडीपी को लेकर सदस्यों ने आपत्ति भी जताई। डीयू के अनुसार एसी सदस्यों की ओर से इस पर आए सुझावों के पश्चात कुलपति ने मसौदे की समीक्षा के लिए कमेटी गठित कर दी।
एनईपी से पहले किसी विषय में फेल हुए छात्र को पास होने का मिलेगा मौका: डीयू में यदि कोई छात्र एनईपी से पहले तीन वर्षीय प्रोग्राम में किसी पेपर में पास नहीं हो पाया है तो उस छात्र को पास होने का मौका मिलेगा। छात्र को स्नातक कोर्स पूरा करने की समयावधि के दौरान उस विषय के पेपर को पास करना होगा।
विदेशी भाषा कोर्स शुरू करने को मिली मंजूरी
अकादमिक काउंसिल की बैठक में पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग के अंतर्गत रामजस कॉलेज, हंसराज कॉलेज और राम लाल आनंद कॉलेज में पूर्वी एशियाई भाषा पाठ्यक्रम शुरू करने संबंधित सामाजिक विज्ञान संकाय की सिफारिशों को भी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
इसके तहत रामजस कॉलेज में कोरियाई भाषा में एडवांस डिप्लोमा कोर्स, हंसराज कॉलेज में चीनी भाषा में सर्टिफिकेट कोर्स, कोरियाई भाषा में डिप्लोमा एवं जापानी भाषा में डिप्लोमा कोर्स शुरू होंगे। वहीं, राम लाल आनंद कॉलेज में भी चीनी भाषा में एडवांस डिप्लोमा कोर्स और जापानी भाषा में एडवांस डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे।
सेंट स्टीफंस के प्रिंसिपल से संवाद के लिए कमेटी गठित
अकादमिक काउंसिल सदस्य डॉ. आलोक रंजन पांडेय ने बताया कि सेंट स्टीफंस प्रिंसिपल से संवाद के लिए एक कमेटी भी गठित की गई। दरअसल सदस्यों ने सेंट स्टीफंस कॉलेज के प्रिंसिपल पर विश्वविद्यालय के नियमों की पालना में अवहेलना के मुद्दे को उठाया था। इसके बाद कुलपति ने प्रिंसिपल से संवाद के लिए एसी सदस्यों की एक कमेटी गठित की। इसमें काउंसिल सदस्यों डॉ. हरेंद्र नाथ तिवारी, डॉ. आलोक पांडेय और डॉ. माया जॉन को शामिल किया गया है।
सदस्यों ने 12 कॉलेजों में वेतन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया
काउंसिल की बैठक में शून्य काल में सदस्यों की ओर से 12 कॉलेजों में वेतन नहीं मिलने और तदर्थ शिक्षकों के मुद्दे को भी उठाया। सदस्यों की ओर से कहा गया कि लंबे समय से दिल्ली सरकार की ओर से पर्याप्त फंड जारी नहीं होने के कारण इन कॉलेजों में वेतन देने में दिक्कत आ रही है। बैठक में शून्य काल के दौरान परिषद के सदस्यों ने कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की और अपने-अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।
मेडिकल आधारित कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव पास
अकादमिक काउंसिल की बैठक में मेडिकल आधारित कोर्सेज को शुरू करने को प्रस्ताव को भी पास कर दिया गया। चिकित्सा विज्ञान संकाय की सिफारिशों के अनुसार यूसीएमएस के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में बैचलर्स इन मेडिकल लेबोरेटरी साइंस (बीएमएलएस) पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए अध्यादेश और पाठ्यक्रम को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
इसके अलावा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एलएचएमसी के एनेस्थीसिया विभाग में डीएम (पीडियाट्रिक एंड नियोनेटल एनेस्थीसिया) कोर्स के सुपर-स्पेशलिटी नए कोर्स के लिए पाठ्यक्रम को भी पारित किया गया।