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दिल्ली: जब दंगों की साजिश की पुलिस को जानकारी थी तो रोकने के प्रयास क्यों नहीं किए? उमर खालिद ने सवाल उठाया

Tue, 30 Nov 2021 12:57 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

सवाल यह उठता है कि जब पुलिस को दंगों की जानकारी थी तो उससे निपटने के लिए क्यों नहीं कोई कदम उठाया। स्पष्ट है कि पुलिस की कहानी गलत है और पुलिस ने उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया है।
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उमर खालिद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद ने सवाल उठाया कि जब पुलिस के पास दंगों के षड्यंत्र की पहले ही जानकारी रखने वाला गवाह था तो पुलिस ने दंगों को रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए। कड़कड़डूमा अदालत के अपर सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष उमर की ओर से जमानत पर जिरह करते हुए अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने ये तर्क रखा।

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उन्होंने कहा गवाह ने कहा है कि उसे दंगों की जानकारी थी। सवाल यह उठता है कि जब पुलिस को दंगों की जानकारी थी तो उससे निपटने के लिए क्यों नहीं कोई कदम उठाया। स्पष्ट है कि पुलिस की कहानी गलत है और पुलिस ने उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया है। इस मामले में अब सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने एक गवाह के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उसके अनुसार वह स्थानीय एसएचओ के नियमित संपर्क में रहा है। वह उसे अपडेट रखने के लिए कहते हैं। यदि आप एसएचओ के संपर्क में हैं, तो आपने यह सुनिश्चित क्यों नहीं किया कि कुछ भी नहीं हुआ? क्या यह स्पष्ट नहीं है कि इन गवाहों की खरीद की गई थी?
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उन्होंने कहा इस गवाह ने जनवरी 2020 में किसी समय एसएचओ से मुलाकात की और अधिकारी सब कुछ पहले से जानते थे। जनवरी में गवाह थानाध्यक्ष से मिला इससे स्पष्ट है कि सीलमपुर एसएचओ को सब कुछ पता था। उनके मुवक्किल ने दंगे कैसे कराए? यह जानकारी पहले से होने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई?

अधिवक्ता ने पुलिस की भूमिका संदिग्ध बताते हुए कहा कि गवाहों के बयानों में आरोपियों द्वारा आयोजित गुप्त बैठक के बारे में जिक्र है जिसमें कथित तौर पर दंगों की योजना बनी थी। उन्होंने कहा एक कानून के खिलाफ वकालत अपराध नहीं है।

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