कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से लागू सप्ताहांत कर्फ्यू के पहले दिन शनिवार को सड़कों पर इक्के-दुक्के लोग ही नजर आए। बारिश और बंदिशों की वजह से अधिकतर सड़कें वीरान रहीं। अधिकतर लोग घरों में कैद रहे। गिनती के कुछ यात्रियों के साथ बसें दौड़ती रहीं। शहर में जगह-जगह वैरिकेड लगाकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। वाहनों की सुरक्षा जांच के बाद ही ही आगे बढ़ने दिया गया।
बसों में यात्रियों को प्रवेश के लिए ई- पास, पहचान पत्र या जरूरी कार्यों से संबंधित साक्ष्य दिखाने के बाद ही प्रवेश की इजाजत दी गई। हालांकि, कई जगहों पर लोग बिना पास के घूमते हुए दिखाई दिए। पटेल नगर से करोल बाग के बीच मुख्य मार्ग से जुड़ने वाली 90 फीसदी सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए गए थे। जिनके पास पहचान पत्र या दूसरे मान्य दस्तावेज नहीं थे, उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। शनिवार को संवाददाता सर्वेश कुमार ने हालात का जायजा लिया, पेश है इसकी रिपोर्ट।
दस्तावेज की जांच के बाद ही बसों में प्रवेश
द्वारका सेक्टर-1 बस स्टॉप पर बस रुकते ही लोग प्रवेश करने लगे। कंडक्टर ने उन्हें पहले रोका, फिर पूछा पहचान पत्र, ई-पास या डॉक्टर की पर्ची है। अगर नहीं है तो कृपया सवार न हो। इसकी इजाजत नहीं है, अगर जांच होती है तो कार्रवाई होगी। द्वारका सेक्टर-1 से कनॉट प्लेस के बीच के सभी स्टॉप पर कर्फ्यू के दिन शनिवार को बसों का परिचालन कुछ इस तरह ही चलता रहा। यात्रियों की संख्या कम होने की वजह से सभी की जांच भी की जा रही थी। जिनके पास दस्तावेज नहीं थे, उन्हें बसों में यात्रा की इजाजत नहीं मिली।
पहचान या काम न बताने पर बस में नहीं होने दिया सवार
राजेंद्र प्लेस स्टॉप पर क्लस्टर बस पहुंची तो रूट नंबर 803 में मौजूद कंडक्टर ने बच्चे के साथ बस में सवार हो रही महिला से पूछा पहचान पत्र या ई- पास है। उसने जवाब दिया नहीं। फिर पूछा डॉक्टर के पास या अस्पताल तो नहीं जाना है, महिला ने कहा नहीं, मुझे नोएडा जाना है। उसे मना करने के बाद बच्चे के साथ महिला घर लौट गई। दिहाड़ी पर काम करने वाले एक व्यक्ति जरूरी कागजात नहीं दिखा सका। उसने कहा कि सोमवार को पास बनवा लेगा, मगर कंडक्टर ने कहा कि नियमों का पालन करना होगा। उसे लौटना पड़ा।
लगातार बारिश से भी सड़कें रहीं वीरानी
सप्ताहांत कर्फ्यू के दौरान हर तरफ सख्ती दिखीं और मुख्य सड़कों पर दुकानें भी बंद रहीं। बंदिशें होने की वजह से बसों में एक-तीन यात्री ही दिखे। कभी अगर संख्या बढ़ी भी तो कुछ स्टॉप बाद फिर कम हो गई। लगातार बारिश और संक्रमण के खतरे को देखते हुए लोगों ने भी घर में रहना बेहतर समझा, इसलिए सार्वजनिक परिवहन और कुछ निजी वाहनों को छोड़, सड़कें वीरान दिखीं। बसें नियत समय पर अलग अलग रूटों पर चलती रहीं। न तो कहीं जाम और न ही देरी होने की चिंता। न तो कोई पैदल चलता नजर आया और दोपहिया वाहनों की संख्या भी काफी कम रही।
जलभराव के कारण वाहनों को हुई दिक्कत
लगातार हुई बारिश के कारण पुल प्रह्लादपुर, मुकरबा चौक से जहांगीरपुरी, धौला कुआं के पास रिंग रोड सहित निचले हिस्सों के सभी प्रभावित इलाकों में वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जलभराव के कारण उन वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके वाहन खराब हो गए। रास्ते में न तो कोई मैकेनिक था और न ही इसे कहीं भी छोड़ सकते थे। पुल प्रह्लादपुर के पास बसें पानी में ही रुक गई तो कई कार चालक भी हालात को देखते हुए पहले ही लौट गए। जहांगीरपुरी बस डिपो और मेट्रो स्टेशन के बाहर भी सुबह के वक्त जलभराव से लोगों को काफी परेशानी हुई। इस कारण बसों के रूट में भी बदलाव कर दिया गया।
इन स्थानों में हुआ जलभराव
बारिश के दौरान प्रगति मैदान, आईटीओ, आश्रम, आनंद विहार, सरिता विहार, आजाद मार्केट, जखीरा, धौला कुआं, मथुरा रोड, विकास मार्ग, रिंग रोड,रोहतक रोड, संगम विहार, किराड़ी, आईपी फ्लाईओवर के पास रिंग रोड, मंडावली अंडरपास, पुल प्रहलादपुर अंडपास, द्वारका, नांगलोई, कराला आदि स्थानों पर जलभराव हुआ।
जांच के बाद ही वाहनों को आगे बढ़ने की मिली इजाजत
सड़कों पर निजी वाहनों में लोग अपने जरूरी काम के लिए आ जा रहे थे, मगर उन पर सुरक्षा कर्मी लगातार निगरानी रख रहे थे। सड़कों पर लगे बैरिकेड से गुजरने वाले सभी वाहनों की जांच की जा रही थी ताकि बेवजह कोई भी घरों से बाहर न निकल सके। निजी वाहन चालकों को रोककर पुलिस कर्मी पहचान पत्र की जांच के बाद ही आगे बढ़ने दे दे रहे थे।
मेट्रो में भी कम रही भीड़
मेट्रो स्टेशनों पर भी दोपहर के वक्त भीड़ कम रही। लोग अपने जरूरी काम से भी कम निकले, क्योंकि मौसम खराब होने की वजह से अधिकतर लोगों ने वर्क फ्रॉम होम के तहत दफ्तर का काम किया या फिर निजी वाहनों का इस्तेमाल किया। संक्रमण के खतरे को देखते हुए मेट्रो और बसों में भी भीड़ काफी कम रही। हालांकि मेट्रो की फ्रिक्वेंसी 15-20 मिनट कर दी गई थी, इसलिए यात्रियों को थोड़ा इंतजार तो करना पड़ा, लेकिन कहीं भी भीड़ नहीं थी। करोल बाग मेट्रो स्टेशन के बाहर मौजूद यात्रियों के मार्केट की तरफ बढ़ते ही मास्क न पहनने वालों पर सख्ती की जा रही थी। हालांकि कर्फ्यू के दिन संख्या न के बराबर होने की वजह से सभी नियमों का पालन कर रहे थे। स्टेशनों के बाहर सख्ती बरती जा रही थी।
रेलवे स्टेशन जाने के लिए उतरे कुछ यात्री
रोजाना व्यस्त रहने वाले कनॉट प्लेस में भी शनिवार को हर तरफ वीरानी थी। शिवाजी स्टेडियम या पार्क होटल के पास बसों से उतरकर रेलवे स्टेशन, अस्पताल या बस अड्डा के लिए जाते हुए दिखे। कुछ लोग पैदल चल रहे थे तो उनके पास ई पास या टिकट थे। सुरक्षा कर्मियों को दिखाने के बाद उन्हें जाने की इजाजत दे दी गई। अस्पतालों के पास एंबुलेंस भी तैयार दिखे, मगर कर्फ्यू के दौरान अधिकतर जगहों पर पाबंदियों का पालन सख्ती से किया जा रहा था।