नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद स्वस्थ हुए टाइप-2 मधुमेह रोगी लंबे समय बाद भी कमजोरी और थकान महसूस कर रहे हैं। इन रोगियों में पोस्ट कोविड स्थिति का असर कई महीने बाद तक देखने को मिल रहा है। यह खुलासा एक अध्ययन में हुआ है, जिसे फोर्टिस सी-डॉक, एम्स, सी-नेट, एन-डॉक व डायबिटीज फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
राष्ट्रीय मधुमेह दिवस से पहले विशेषज्ञों ने इस अध्ययन को जारी किया। इस दौरान फोर्टिस अस्पताल के डॉ. अनूप मिश्रा ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद सबसे ज्यादा लोगों में मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, खांसी और सांस फूलना, थकान जैसे लक्षण ही देखने को मिल रहे हैं।
डायबिटीज एंड मैटाबोलिक सिंड्रोम : क्लीनिकल रिसर्च एंड रिव्यूज मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन से पता चला है कि टाइप 2 मधुमेह रोगियों को संक्रमण के बाद थकान हावी रहती है। मधुमेह के कारण कोविड-19 की स्थिति ज्यादा जटिल हो जाती है और इससे मरीज में अत्यधिक रुग्णता, यहां तक कि मृत्यु की स्थिति भी बन सकती है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि अध्ययन के दौरान टाइप-2 मधुमेह रोगियों का चयन किया गया। ओपीडी में आने वाले मरीजों का चयन करने के बाद पता चला कि 52 को टाइप-2 मधुमेह था और यह सभी संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हुए हैं। इनके अलावा 56 टाइप-2 मधुमेह रोगी ऐसे थे जिन्हें कोविड नहीं हुआ था। इन्हें दूसरे समूह में रखा गया।
इसके बाद दोनों समूह के चिकित्सीय इतिहास इत्यादि के आधार पर अध्ययन शुरू किया गया। अध्ययन में डॉक्टरों ने यह भी पाया है कि कोरोना के बाद करीब 92 (32 से 262 दिन) दिन तक पोस्ट कोविड के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
डॉ मिश्रा ने कहा कि मधुमेह रोगियों को पहले से अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। महामारी के दौरान इस ओर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। जो लोग संक्रमित हुए हैं और अब ठीक तो हो गए लेकिन उन्हें भी अगर इसी तरह की शिकायत है तो सही चिकित्सीय परामर्श बेहद जरूरी है। इसी तरह आवश्यक मात्रा में प्रोटीन व विटामिन सप्लीमेंट्स और पोषण लेना चाहिए।