लखनऊ विशेष जांच दल (एसटीएफ) ने विदेशियों के लैपटॉप-कंप्यूटर में वायरस डालकर ठीक करने का झांसा देकर 170 करोड़ रुपये ठगने वाले फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा किया है। एसटीएफ ने शुक्रवार को नोएडा सेक्टर-59 स्थित बी-36 में चल रहे कॉल सेंटर से सरगना सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने अमेरिका से लेकर दुबई तक के सैकड़ाें लोगों से ठगी की है।
कॉल सेंटर से वीओआईपी कॉलिंग का सर्वर लगाकर विदेशियों के लैपटॉप-कंप्यूटर में वायरस डाला जाता था। फिर टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर संपर्क कर लैपटॉप-कंप्यूटर को रिमोट पर लेकर ऑनलाइन अकाउंट से भारतीय अकाउंट में रकम ट्रांसफर की जाती थी।
यूपी एसटीएफ के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सेक्टर-44 निवासी करन मोहन, बेगमगंज गोंडा निवासी विनोद सिंह, सेक्टर-92 निवासी ध्रुव नारंग, सेक्टर-49 निवासी मयंक गोगिया, सेक्टर-15ए निवासी अक्षय मलिक, गढ़ी चौखंडी निवासी दीपक सिंह, गौड़ सिटी निवासी आहूजा पॉडवाल, दिल्ली निवासी अक्षय शर्मा, जयंत सिंह व मुकुल रावत के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से 12 मोबाइल, 76 डेस्कटॉप, 81 सीपीयू, 56 वीओआईपी डायलर, 37 क्रेडिट कार्ड समेत अन्य सामग्री बरामद की गई है।
दुबई से लेकर अमेरिका तक फैला है नेटवर्क
फर्जी कॉल सेंटर का नेटवर्क दुनिया के कई देशों में है। आरोपियों ने अमेरिका, कनाडा, लेबनान, ऑस्ट्रेलिया, दुबई से लेकर कई पश्चिमी देशों के लोगों से ठगी की है। नोएडा के कॉल सेंटर में पचास से अधिक लोग रोजाना काम कर रहे थे। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।
किराए के विदेशी खातों में रुपये ट्रांसफर करते थे
फर्जी दस्तावेज से आरोपियों ने अलग-अलग नाम से कंपनियां बना रखी थीं। कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों से संपर्क कर कंप्यूटर व लैपटॉप में वायरस डालकर ठीक करने का झांसा दिया जाता था। टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर आरोपी अलग-अलग सॉफ्टवेयर से लैपटॉप-कंप्यूटर को हैक कर लेते थे और विदेशी नागरिकों के ऑनलाइन खाते या क्रेडिट कार्ड की डिटेल चुराकर किराए पर लिए गए विदेशी खातों में रुपये ट्रांसफर कर लेते थे।
हवाला के माध्यम से आता था पैसा
गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आता था। किराए के अकाउंट में डॉलर में पैसे जाते थे। फिर किराए पर अकाउंट देने वाले कमीशन काटकर भारत में रुपये ट्रांसफर कर देते थे।
यह होता है वीओआईपी
वीओआईपी का मतलब वॉयर ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल होता है। यह व्हाट्स एप कॉलिंग जैसे काम करता है यानी इसकी रिकॉर्डिंग आदि नहीं होती है। यह इंटरनेट कॉलिंग है।