उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रोजेक्ट दिल्ली की तरक्की के लिए अहम साबित होगा। डीएमआरसी और पीडब्ल्यूडी के इस संयुक्त प्रयास से फ्लाईओवर के निर्माण में करदाताओं के करीब 140 करोड़ रुपये, जबकि मेट्रो निर्माण में 40 करोड़ रुपये सहित कुल 180 करोड़ की बचत होगी।
दो वर्ष में परियोजना को पूरा किया जाएगा
पहले इस फ्लाईओवर के निर्माण और इससे जरूरी बुनियादी सुविधाओं के विस्थापन पर 359.70 करोड़ रुपये की लागत थी। इंटीग्रेटेड डिजाइन से 140 करोड़ रुपये की बचत के बाद इसकी लागत 220.10 करोड़ रुपये रह गई है। 1457 मीटर के मेट्रो लाइन की लागत भी 105 करोड़ से घटकर 67 करोड़ रुपये रह गई है। इससे करीब 40 करोड़ रुपये बचेंगे। सिसोदिया ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से न केवल जनता के टैक्स के पैसों की बचत होगी, बल्कि सघन आबादी वाले इस क्षेत्र में जमीन का बेहतर इस्तेमाल भी होगा। दो वर्ष में इस परियोजना को पूरा किया जाएगा। निर्माण पूरा होने से आसपास के क्षेत्र की जनता को लंबे ट्रैफिक जाम से नहीं जूझना पड़ेगा और समय की भी बचत होगी। फ्लाईओवर और मेट्रो का यह एकीकृत मॉडल पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहतर साबित होगा।