1997 के उपहार अग्निकांड से जुड़े साक्ष्यों से छेड़छाड़ मामले में अदालत शुक्रवार को फैसला सुना सकती है। मामले में अन्य लोगों के साथ सुशील अंसल और गोपाल अंसल को नामजद किया गया था।
पटियाला हाउस अदालत के मुख्य महानगर दंडाधिकारी पंकज शर्मा ने बृहस्पतिवार को अंतिम जिरह पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। मामला मुख्य उपहार मामले से जुड़े साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने से जुड़ा है। उपहार अग्निकांड में 59 लोग मारे गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को दो साल कैद की सजा सुनाई थी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को काटी गई सजा और 30-30 करोड़ रुपये जुर्माने के बाद रिहा कर दिया था। इस राशि का प्रयोग राजधानी में ट्रॉमा सेंटर बनाने में किया जाना था।
पेश मामले में अंसल बंधुओं के साथ कोर्ट स्टाफ दिनेश चंद शर्मा के अलावा पीपी बत्रा, हर स्वरूप पंवार, अनूप सिंह और धर्मवीर मल्होत्रा को नामजद किया गया था। पंवार और मल्होत्रा की मामले की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
मामले की सुनवाई के दौरान बृहस्पतिवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने उपहार हादसा पीड़ितों की ओर से कोर्ट को बताया कि अंसल बंधुओं और एचएस पंवार ने मुख्य उपहार केस में सीबीआई द्वारा जुटाए साक्ष्यों को नष्ट करने की साजिश रची थी। इनमें से चुनकर अहम दस्तावेजों को नष्ट कर दिया गया और उनमें काफी गायब हो गए।