पिछले साल अंसल भाइयों और पूर्व कोर्ट स्टाफ दिनेश चंद शर्मा और दो अन्य- पीपी बत्रा व अनूप सिंह करायत को ट्रायल कोर्ट ने सात साल कारावास की सजा सुनाई थी और सत्र न्याायलय ने इस आदेश को रद्द करने और उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।
अंसल भाइयों ने अपने बुढ़ापे समेत कई अन्य दलीलें देते हुए सजा को रद्द करने का आग्रह किया था। इस याचिका का दिल्ली पुलिस और एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रेजेडी (एवीयूटी) ने विरोध किया था।
सबूतों से छेड़छाड़ सबसे पहले 20 जुलाई 2002 में सामने आई। उस समय शर्मा के खिलाफ एक विभागीय जांच शुरू की गई थी, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद जांच की गई और उसे 25 जून 2004 को बर्खास्त कर दिया गया। मेजिस्ट्रियल कोर्ट ने अंसल भाइयों पर सात साल कैद के साथ-साथ 2.25-2.25 करोड़ रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है।
एवीयूटी की चेयरपर्सन नीलम कृष्णमूर्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद यह केस दर्ज किया गया था।