बेटी के सपने को सच करने के लिए उसे यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए भेजा था, लेकिन पता नहीं था कि बेटी को भेजने के एक साल के भीतर ही इस तरह के हालात पैदा हो जाएंगे। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के कारण जिगर के टुकड़ा का लौटना मुश्किल लग रहा है। यह कहते ही एमबीबीएस की छात्रा आरुषि के पिता आशीष फफक पड़े। यह कहानी सिर्फ आशीष की नहीं, बल्कि तमाम उन सभी अभिभावकों की है जो इन दिनों अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता में हैं और लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
रविवार को मंडी हाउस पर सैकड़ों की संख्या में पहुंचे अभिभावकों ने अपन दर्द साझा किया। प्रदर्शन में शामिल अभिभावक आशीष जैन ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए बीते वर्ष ही खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी भेजा था। सब कुछ ठीक चल रहा था और बेटी अच्छी तरह से पढ़ रही थी, परंतु अचानक रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद हालात बदल गए।
आशीष ने बताया कि जब से पड़ोसी देश ने यूक्रेन पर हमला किया है, तब से बेटी सहमी हुई है। यह हालात सिर्फ बेटी के नहीं बल्कि उसके साथ मौजूद करीब 800 से अधिक छात्रों के हैं, जो हॉस्टल की बेसमेंट में रहकर खुद को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं। बंकर में मौजूद छात्रों में भय का माहौल इस कदर है कि बाहर हल्की सी आहट होने पर ही सहम उठते हैं। बार-बार बच्चे अपने अभिभावकों से वतन वापसी के लिए गुहार कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि यूक्रेन में कई बार इंटरनेट सेवा प्रभावित होने पर चिंता और बढ़ जाती है।