दिल्ली मेट्रो के 23.6 किलोमीटर के दायरे में निर्माणाधीन एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर पर 6169 पेड़ों को विस्थापित किया जाएगा। इनमें रिज क्षेत्र और आसपास के 4766 पेड़ों को काटा जाएगा। इनमें करीब 2200 पेड़ ट्रांसप्लांट किए जाएंगे ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। हरियाली को नुकसान से बचाने के लिए द्वारका के 34000 पेड़ लगाए जाएंगे।
पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील रिज क्षेत्र के दायरे में 1072 पेड़ होने की वजह से मेट्रो निर्माण में मुश्किलें पेश आ रही थीं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट पर जनहित में इस परियोजना के लिए अनुमति देने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 6,961 पेड़ों में से 4,766 पेड़ काट दिए जाएंगे जबकि बचे पेड़ों का प्रत्यारोपण किया जाएगा।
34 हजार पौधों से होगी भरपाई
रिज क्षेत्रों में हरित क्षेत्र को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए द्वारका स्थित धूल सिरस गांव में 25 हेक्टेयर भूमि को अधिसूचित संरक्षित वन क्षेत्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। भरपाई के तौर पर यहां स्वदेशी प्रजातियों के 34,000 पौधे लगाए जाएंगे। इस कॉरिडोर के आर्थिक, पर्यावरण, तकनीकी पहलुओं पर गौर करने सहित मेट्रो से लोगों की सहूलियत को देखते हुए सिफारिश की गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी)का अनुमान के है कि इस कॉरिडोर पर औसतन 1 लाख 66 लाख यात्राएं रोजाना की जाएंगी।
छत्तरपुर पर होगी इंटरचेंज की सुविधा
दिल्ली मेट्रो के फेज-4 में 23.62 किलोमीटर लंबे एयरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर में 15 स्टेशन होंगे। रिज क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कुल 1.29 लाख वर्ग मीटर भूमि का उपयोग किया जाना है। रिज मैनेजमेंट बोर्ड ने इस परियोजना को 14 जुलाई को मंजूरी दी थी। इनमें महिपालपुर, वसंत कुंज, किशनगढ़, इग्नू रोड, नेब सराय, अंबेडकर नगर और संगम विहार सहित अन्य स्टेशन भी होंगे। छतरपुर मेट्रो स्टेशन पर येलो लाइन के लिए इंटरचेंज की सुविधा होगी।