भजनुपरा से करोल बाग जाने के लिए शास्त्री पार्क मेट्रो पहुंचने में 15 मिनट का वक्त लगता है जबकि ई रिक्शा पर 20 रुपये खर्च करना होता है। इसके बाद भी रास्ते में जाम से जूझना पड़ता है। ई रिक्शा के लिए मार्गों पर प्रतिबंध होने के कारण भी कई बार यात्रियों को अधिक वक्त लगने के बाद भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अंतिम छोर तक पहुंचने में अभी भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कॉलोनियों की गलियों में रहने वालों को खास तौर पर अधिक दिक्कत होती है, क्योंकि उन्हें मेट्रो या बस स्टॉप तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है।
विपिन, स्थानीय निवासी, भजनपुरा
रोहिणी से रिठाला मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए रोजाना ऑटो में एक तरफ का किराया 60 रुपये खर्च करना पड़ता है। बस स्टॉप या ऑटो के लिए भी करीब 500 मीटर पैदल चलना पड़ता है जबकि मेट्रो से उतरने के बाद भी कनॉट प्लेस में करीब एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। अगर मेट्रो और बस स्टॉप तक के लिए हर वक्त छोटे वाहनों की सुविधा हो और कम खर्च करना पड़े तो राहत मिल सकती है।
अमित, सेक्टर-20, रोहिणी, सेक्टर-20
सीलमपुर के ई रिक्शा चालक विक्रम को इस बात की चिंता सता रही है कि दिल्ली की 236 सड़कों पर ई-रिक्शा के संचालन पर पाबंदी है। इके तहत नई दिल्ली क्षेत्र में 77, दक्षिणी दिल्ली में 38 सड़कों सहित रिंग रोड, विकास मार्ग और शकरपुर चौक से मदर डेयरी रोड व दूसरी सड़कें भी शामिल हैं। सभी मेट्रो स्टेशन और बस स्टॉप के आसपास मुख्य सड़कें हैं। प्रतिबंधित सड़कों से बचने के लिए दूसरे मार्गों को अपनाना पड़ता है। इससे कई बार यात्रियों को अधिक वक्त लगने की शिकायत रहती है। इसमें राहत मिलने से अंतिम छोर तक पहुंचना यात्रियों के लिए बेहद आसान हो जाएगा।
विक्रम, ई रिक्शा चालक, सीलमपुर
यात्रियों के आवागमन में सहूलियतें तो पहले से काफी बढ़ी हैं। मगर, आबादी बढ़ने के साथ गंतव्य तक पहुंचने की राह में मुश्किलें पूरी तरह कम नहीं हुई। इसके लिए संगठित तरीके से ऑटो और ई रिक्शा का परिचालन होना चाहिए। तयशुदा वक्त और नियत स्थान पर अगर निश्चित संख्या में वाहन उपलब्ध हो तो परेशानी हद तक कम हो सकती हैं। यात्रियों के लिहाज से कुछ और बदलाव किए जा सकते हैं ताकि कैब की तर्ज पर उन्हें ई रिक्शा और ऑटो की सुविधा भी मिल सके।
-संजय चावल, प्रधान, तिपहिया ऑटो चालक संघ, यूनियन के प्रधान